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चिराग स्वदेश का-हिन्दी शायरी (chirag swadesh ka-hindi shayari)


तरक्की के रास्ते पर
बस कार ही चलती है,
दूध की नदिया बहती थी जहां
पेट्रोल की धारा वहाँ मचलती है।
कहें दीपकबापू
विदेशी पेट्रोल की चाहत में
दूध, दही और खोवा हो गया नकली
अब स्वदेशी चिराग में
देश प्रेम की लौ मंद जलती है।
लेखक और संपादक-दीपक “भारतदीप”,ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak ‘BharatDeep’,Gwalior

writer aur editor-Deepak ‘Bharatdeep’ Gwalior

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