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देशप्रेम की आड़ में साम्राज्यवादी प्रवृत्ति का मनोरंजन-हिन्दी व्यंग्य चिंत्तन


प्रचार माध्यम लगातर बता रहे हैं कि मोहाली में भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का महामुकाबला हो रहा है। कुछ लोग तो उसे फायनल तक कह रहे हैं। बाज़ार के सौदागर और उनके अनुचर प्रचार माध्यम इस मुकाबले के नकदीकरण के लिये जीजान से जुट गये हैं। दरअसल यह क्रिकेट पीसीबी  (pakistan cricket board) और बीसीसीआई (bhartiya cricket control  board) नामक दो क्लबों की टीमों का मैच है। पीसीबी पाकिस्तान तथा बीसीसीआई भारत की स्वयंभू क्रिकेट नियंत्रक संस्थाऐं जिनको अंतर्राष्ट्रीय क्र्रिकेट परिषद नामक एक अन्य संस्था लंदन से नियंत्रित करती है। यह सभी संस्थायें किसी सरकार ने बनाई जिनको देश का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। यह सरकारें इन संस्थाओं पर अपना कोई विचार लाद नहीं सकती क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय खेल नियमों पर चलती हैं।
कहते हैं कि ‘झूठ के पांव नहीं होते हैं’। साथ ही यह भी कहा जाता है कि एक ही झूठ सौ बार बोला जाये तो वह सच लगने लगता है। पुराने कथनों कें ऐसे विरोधाभास ही उनके सतत चर्चा का कारण बनते हैं। जहां जैसा देखो पुराना कथन दोहरा दो। अब हम कहते हैं कि एक झूठ हजार बार बोलो तो वह महान सत्य और लाख बार बोलो तो शाश्वत सत्य हो जाता है। टीवी चैनलों और समाचार पत्रों का समाज पर ऐसा जबरदस्त प्रभाव है कि उनकी बात की काट करना लगभग असंभव है और उनके फैलाये जा रहे भ्रम देखकर तो यही लगता है कि पुरानी ढेर सारी कहानियां भी शायद ऐसे ही कल्पना के आधार पर लिखी गयीं और उनके सतत प्रचार ने उनको ऐसा बना दिया कि लोग उसमें वर्णित नायकों तथा नायिकाओं को काल्पनिक कहने पर ही आपत्ति करने लगते हैं।
अब तो हद हो गयी है कि प्रचार माध्यमों ने एक खिलाड़ी को क्रिकेट का भगवान बना दिया जिसका प्रतीक बल्ला है। हमें इस पर भी आपत्ति नहीं है। वैसे कुछ मित्र समूहों में जब इस पर आपत्ति की तो मित्रगण नाराज हो गये तब तय किया कि यह आपत्ति बंद करना चाहिए। दूसरे की आस्था पर चोट पहुंचाने की क्रिया को हमारा अध्यात्मिक ज्ञान तामस बुद्धि का प्रमाण मानता हैै। हमने बंद किया पर क्रिकेट के भगवान के भक्तों ने हद ही पार कर दी। उसके चलते हुए बल्ले की तुलना भगवान श्रीराम के टंकारते हुए धनुष तथा भगवान श्रीकृष्ण के घूमते हुए चक्र से कर डाली। हमें इस पर गुस्सा नहीं आया पर आपत्ति तो हुई। हमारा कहना है कि जब तुम्हारे क्रिकेट भगवान क पास बल्ला है तो उसके साथ धनुष तथा चक्र क्यों जोड़ रहे हो? भगवान श्रीराम तथा श्रीकृष्ण का नाम क्यों जोड़ रहे हो?
यह प्रयास ऐसा ही है जैसे कि एक झूठ को लाख बार बोलकर शाश्वत सत्य बनाया जाये। यह झूठ को पांव लगाने का यह एक व्यर्थ प्रयास है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का नाम एक कृत्रिम भगवान को पांव लगाने की कोशिश से अधिक कुछ नहीं है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने न तो अपने कर्म की फीस ली और न ही विज्ञापनों में अभिनय किया। सांसरिक रूप से दोनों त्यागी रहे। उनके भगवान तो फीस लेकर खेलते हैं, विज्ञापन में बताते है कि अमुक वस्तु या सेवा उपयोगी है उस पर पैसा खर्च करें। क्रिकेट के भगवान की छवि भोग, अहंकार तथा मोह को बढ़ाने वाली है और जिन भगवान श्रीराम तथा कृष्ण का वह नाम लेकर उसे चमका रहे हैं वह त्याग का प्रतीक हैं।
हैरानी की बात है कि किसी ने इस आपत्ति नहीं की। किसी वस्तु पर भगवान की तस्वीर देखकर लोग अपनी आस्था का रोना लेकर बैठ जाते हैं। किसी भारतीय भगवान का चेहरा लगाकर कोई नृत्य करता है तो उस पर भी आवाजें उठने लगती हैं। तब ऐसा लगता है कि हम भारतीय धर्म को लेकर कितना सजग हैं। जब किसी की क्रिकेट खिलाड़ी या फिल्म अभिनेता के साथ भगवान का नाम जोड़ा या कामेडी शो मे अध्यात्मिक के भगवान का नाम आता है तब सभी की जुबान तालु से क्यों चिपक जाती है? सीधा जवाब है कि धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाला भी यह बाज़ार है जो ऐसे अवसरों पर पैसा खर्च करता है तो उनका उपयोग करने वाला भी यही बाज़ार है। बाज़ार और उसके प्रचारतंत्र के जाल में आम आदमी अपनी बुद्धि सहित कैद है भले ही अपने अंदर चेतना होने का वह कितना दावा करे। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में आंदोलन, अभियान तथा आंतक का आधार ही अर्थ है। यह अलग बात है कि अज्ञानी लोग उसमें धर्म, जाति, भाषा तथा क्षेत्रीय आधार पर उनका विश्लेषण करते हैं। वैचारिक समंदर में लोग उथले जल में ही तार्किक उछलकूद करते नज़र आते हैं।
पाकिस्तान के नाम से खेलने वाली पीसीबी तथा भारत के नाम से खेलने वाली बीसीसीआई की टीमों के मैच में देशभक्ति का दांव लगता है। अपने अध्यात्मिक दर्शन से दूर लोग इस मैच के प्रति ऐसे मोहित हो रहे हैं जैसे कि इससे कोई बहुत बड़ा चमत्कार सामने आने वाला है। मैच को जंग बताकर दोनों तरफ से बोले जा रहे वाक्यों को तीर या तलवार की तरह चलता दिखाया जा रहा है। भविष्यवक्ता अपने अपने हिसाब से भविष्यवाणी बता रहे हैं। मतलब प्रयास यही है कि क्रिकेट के नाम पर अधिक से अधिक पैसा लोगों की जेब से निकलवाया जाये। हैरानी की बात है कि एक तरफ कुछ खिलाड़ियों पर क्रिकेट मैचों में सट्टेबाजों से मिलकर खेल तथा परिणाम प्रभावित करने के आरोप लगते हैं। एक चैनल ने तो यह भी कहा है कि मोहाली का भारत पाकिस्तान मैच भी फिक्स हो सकता है। इसके बावजूद लोग मनोरंजन के लिये यह मैच देखना चाहते हैं। भारतीय दर्शक पीसीबी की टीम को अपनी टीम से हारते देखना चाहते हैं। यह मनोरंजन है यह मन में मौजूद अहंकार के भाव से उपजी साम्राज्यवादी प्रवत्ति है। हां, अपने कुल, शहर, प्रदेश तथा देश को विजेता देखने की इच्छा साम्राज्यवादी की प्रवृत्ति नहीं तो और क्या कही जा सकती है। कुछ लोग इसे देशभक्ति कहते हैं पर तब यह सवाल उठता है कि जिन भारतीयों को फिक्सिंग का दोषी पाया गया उनका क्या किया? देश के नाम से खेले जा रहे मैच में हार की फिक्सिंग करना आखिर क्या कहा जाना चाहिए? हम यहां देशद्रोह जैसा शब्द उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि हमारा मानना है कि यह एक मनोरंजन का व्यापार है और उसमें देश, जाति, भाषा या धार्मिक समूहों के सिद्धांत लागू नहीं होते।
हमने इसे मनोरंजन का व्यापार भी इसलिये कहा क्योंकि जब मैचों के इनाम बंटते हैं तब उद्घोषक बताते हैं कि इसमें अमुक खिलाड़ी ने दर्शकों का ढेर सारा मनोरंजन किया। तब मनोरंजन में देशप्रेम जैसा शब्द ठीक नहीं लगता। एक चैनल तो बता रहा था कि ‘26/11 के बाद पहली बार पाकिस्तानी टीम भारत पहुंची है।’
हम अक्सर देखते हैं कि कोई आदमी कोई उपलब्धि पाकर घर लौटता है तो शहर के लोग उसका स्वागत करने पहुंचते हैं और कहते हैं कि ‘वह कामयाबी के बाद पहली बार घर आ रहा है।’
तब क्या यह माने कि 26/11 को मुंबई में हुई हिंसा ऐसा वाक्या है जिसका श्रेय पाकिस्तानी यानि पीसीबी की टीम को जाता है और मोहली पहुंचने पर उनका अभिनंदन किया गया। देश में क्रिकेट जुनून नहीं जुआ और सट्टा की गंदी आदत है जिससे क्रिकेट खेल के माध्यम से भुनाया जा रहा है मगर इसका मतलब यह नहीं कि जोश में आकर कुछ भी कहा दिया जाये। इसमें कोई संशय नहीं है कि 26/11 का हादसा भयानक था और पीसीबी की क्रिकेट टीम को उससे नहीं जोड़ना चाहिए। हम भी नहीं जोड़ते पर यह काम तो उसी बाज़ार के वही प्रचाकर कर रहे हैं जो आजकल के क्रिकेट से जमकर पैसा कमा रहे हैं।
यकीनन साम्राज्यवाद की प्रवृत्ति मनोरंजन करते हुए भी मन में रहती है यह बात अब समझ में आने लगी है। लोग पाकिस्तानी या पीसीबी की क्रिकेट टीम को हारते देखना चाहते हैं कि उसके प्रति दुश्मनी का भाव रखते है, मगर फिल्मों में पाकिस्तानी गायकों को सुनते हैं। टीवी चैनलों पर पाकिस्तानी अभिनेता और अभिनेत्रियां आकर छा जाते हैं तब देशप्रेम कहां चला जाता है। उस यही बाज़ार और प्रचारक मित्रता का गाना गाने लगते हैं। आम आदमी में चिंतन क्षमता की कमी है और वह वही जाता है जहां प्रचारक उसे ले जाते हैं। मनोरंजन में साम्राज्यवाद की प्रवृत्ति उसे इस बाज़ार का गुलाम बनाती है जो कभी दुश्मन तो कभी दोस्त बनने को मज़बूर करती है।
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लेखक संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर

athour and writter-Deepak Bharatdeep, Gwalior

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क्रिकेट मैच का बराबर रहना-हिन्दी व्यंग्य


अरे यह क्या? बीसीसीआई और इंग्लैंड की टीम के बीच विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता में खेले गये एक मैच की समाप्ति से पहले ही आस्ट्रेलिया के पूर्व स्पिनर शेन वार्न ने अपने ट्विटर पर भविष्यवाणी कर दी थी की मैच टाई होगा-यह जानकारी इंटरनेट की एक पत्रिका ने दी है। मैच के हारने जीतने की भविष्यवाणी तो कोई भी कर सकता है पर टाई, बराबर या अनिर्णीत होने की बात करने का दावा! वह भी सच निकले। वह भी ऐसे अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी की भविष्यवाणी जिसके बारे में कहा जाता है कि वह आनॅलाईन सट्टा चलाता है। यह मामला चौंकाने वाला है।
क्रिकेट के पीछे फिक्सिंग का भूत हमेशा ही पड़ा रहता है। इस भूत को खड़ा भी वही लोग करते हैं जो स्वयं इससे पैसा कमाते हैं। शेन वॉर्न अगर क्रिकेट नहीं खेलता तो शायद उसे दुनियां में कोई नहीं जानता। विश्व क्रिकेट प्रतियोगता 2011 में बीसीसीआई और इंग्लैंड की टीम के मैच के टाई होने की भविष्यवाणी की और ऐसा हुआ भी। एक पत्रिका में ही हमने पढ़ा था कि वह बाकायदा क्रिकेट पर ऑन लाईन सट्टा चलाता है। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या वह अपने ट्विटर पर सट्टा लगाने वालों को कोई संदेश दे रहा था या अपनी वेबसाईट पर ऐसा कोई खेल कर रहा था जिसे कोई भारत में समझ नहीं पा रहा।
वैसे सामने गोरी टीम थी तो लोग शायद इस पर यकीन न करें कि उन्होंने ट्ाई फिक्स की होगी। यहां के लोगों का गोरों पर अंधा विश्वास है, पर हमारा मानना है कि वह दिन गये जब गोरों की छवि ईमानदार की थी। अब तो हमें यह भी शक होता है कि पाकिस्तान के जिन तीन खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग में लंदन में धरा गया वह भी एक फिक्स मामला था। इसका उपयोग भारतीय उपमहाद्वीप में 2011 में हो रहे विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में यह संदेश देने के लिये किया गया कि अब सारे मैच साफ सुथरे होंगे। इसके अलावा पकड़े गये एक खिलाड़ी की पोल उसकी पूर्व प्रेमिका से खुलवाई गयी। वह पाकिस्तान की एक अभिनेत्री है जिसे बाद में भारत के एक टीवी चैनल के बिग बॉस कार्यक्रम के लिये चुना गया। क्रिकेट वालों से पंगा लेकर भी वह भारतीय टीवी चैनल के कार्यक्रम में आयी, उसी समय शक हो गया था कि कहीं कुछ गड़बड़ है। देखा जाये तो क्रिकेट और मनोरंजन के खैरख्वाह एक ही हैं ऐसे में यह कैसे संभव है कि एक क्षेत्र को बदनाम करने वाला दूसरे में पांव जमा ले। अब वही अभिनेत्री फिर बिग टॉस कार्यक्रम करने यहां आयी है। उसकी छवि बनी इसलिये थी कि उसने एक अपराध क्रिकेट खिलाड़ी की पोल खोली थी।
मामला फिक्स न लगे इसलिये गोरी पुलिस को बीच में लाया गया। उसने तीन पाकिस्तानी खिलाड़ी पकड़े या उससे पकड़वाये गये यह कहना कठिन है पर इतना तय हो गया कि क्रिकेट में अभी फिक्सिंग यथावत है। अब यह शेन वार्न की भविष्यवाणी सामने आयी है। कुछ लोग उसकी तुलना उस समुद्री जीव ऑक्टोपस बाबा से कर रहे हैं जिसके बारे में कहा गया कि उसने विश्व कप फुटबाल प्रतियोगिता में सही भविष्यवाणी की। एक बात याद रखने लायक है कि उस कथित बाबा की चर्चा भी अनेक मैचों के बाद प्रारंभ हुई थी। अब शेनवार्न भी बाबा के भेस में आ गये हैं। गोरे हैं तो विश्वसीय तो माने ही जायेंगे पर यहां अंग्रेज गोरे क्रिकेट खिलाड़ी शक शुबहे में आ गये हैं। अंपायर भी गोरे थे। हैरानी इस बात की है कि उन्होंने ऐसा क्या गुणा भाग बिठाया कि मैच टाई हो गया और उसके फिक्स होने का आभास तक नहीं हुआ। इन गोरे अंपायरों ने ब्रिटेन के एक खिलाड़ी को पगबाधा नहीं दिया तो एक खिलाड़ी के आउट होने की अपील भारतीय खिलाड़ियों ने नहंी की। हो सकता है कि भारतीय खिलाड़ियों को मतिभ्रम हुआ हो पर जब एक खिलाड़ी को पगबाधा आउट होने की अपील तीसरे अंपायर की तरफ बढ़ायी गयी तो उसने टीवी देखकर भी गलत निर्णय दिया जबकि यह दृश्य पूरी दुनियां को दिखाई दिया कि वह गोरा खिलाड़ी आउट था।
इसके बावजूद भी यह यकीन नहीं होता कि कभी मैच टाई फिक्स हो सकता है। अगर शेन वार्न की भविष्यवाणी को मैच के पहले ही फिक्स होने की बात सोचें तो मानना पड़ेगा कि क्रिकेट खेल में गजब के अभिनेता और निर्देशक आ गये हैं। इतना कि जो मानते हैं कि सारे मैच फिक्स होते हैं वह भी इस मैच को फिक्स नहीं मानेंगे। अब ऑक्टोपस के नये अवतार शेन वार्न पर सारी दुनियां की नज़रे रहेंगी। हर मैच के खत्म होने के एक घंटै पहले उनको ट्विटर पर ढूंढा जायेगा। खासतौर से वह लोग जो क्रिकेट मैचों पर दाव लगाते हैं। ऐसे लोग इस देश में कम नहीं है।
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लेखक संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com

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