Tag Archives: हिंदी व्यंग्य कविता

विकास पर दो हिंदी क्षणिकाएँ


आओ विकास के मसले पर बहस करे,

गड्ढों में सड़क है

अस्पतालों में दवायें नहीं तो क्या

चिकित्सक तो हैं,

बदबूदार है तो क्या

पानी मिलता तो है,

सच्चाई हमेशा कड़वी रहेगी

आओ कुछ देर के लिये

अपनी जुबान से

अपने दिमाग में कुछ सपने भरें।

—————

अंधे हाथी को पकड़कर कर

गलतबयानी करते

तो समझ में आता है,

मगर अब तो आंखें वाले भी

अपने अपने नजरिये से देखने लगे हैं,

दिमाग से नहीं रहा जुबां का रिश्ता

आंखों में तारों की जगह पत्थर लगे है।

————–

लेखक और कवि-दीपक राज कुकरेजा “भारतदीप”

ग्वालियर, मध्यप्रदेश 

Writer and poet-Deepak Raj Kukreja “Bharatdeep”

Gwalior, Madhya pradesh

कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 

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उस्ताद और शागिर्द का मुफ्त का खेल-हिंदी हास्य कविता


उस्ताद ने शागिर्द से कहा
” इस साल के सालाना जलसे के
अपने प्रचार पत्र में तुमने
यह घोषणा कैसे डाल दी है।
हम गरीब बच्चों को
मुफ्त कापियां पेन और किताबें
मुफ्त बांटेंगे,
कभी सोचा है कि
हम चंदे का इस्तेमाल अगर
ऐसा करेंगे तो
क्या खुद पूरा साल धूल चाटेंगे,
विरोधियों को हंसने वाली
यह बैठे बिठाये कैसी चाल दी है.”
सुनकर शागिर्द बोला
“आपके साथ काम करने में
यही परेशानी है,
मेरी चालों से कमाते
पर फिर भी शक जताते
यह देखकर होती हैरानी है,
लोगों के भले का हम दंभ भरते,
छोड़ भलाई सारे काम करते,
पढ़ने वाले गरीब बच्चे
भला हमारे पास कब आयेंगे,
सामान खत्म हो गया
अगर आया कोई भूले भटके तो
उसे बताएँगे,
देश में जितने बढ़े है गरीब,
समाज सेवकों के चढ़े हैं नसीब,
लोगों की इतनी नहीं बढ़ी समस्याएँ,
जितनी उनके लिए बनी हैं समाज सेवी संस्थाएं,
ऐसे में यह मुफ्त मुफ्त का खेल
अब जरूरी है,
सस्ते में दवाएं बांटने का कम हो गया पुराना
इसलिए नया दाव लगाना एक मजबूरी है,
विरोधियों के सारे विकेट उड़ा दे
मैंने यह ऐसी बाल की है।”


कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक ‘भारतदीप”,ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak ‘BharatDeep’,Gwalior

http://dpkraj.blogspot.com

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चाबुक का कमाल -हिंदी व्यंग्य कविता


वह अपनी जान बचाने के लिए
हुकूमत के पहाड़ पर चढ़ गए हैं,
नीचे आकर क्या लोगों की खातिर
दुश्मनों से जंग लड़ेंगे.
कहें दीपक बापू
इंसानों में शेर कहलाने का शौक सभी को है
मगर जिस शिकारी के हाथ में
दौलत, शौहरत और ओहदे का चाबुक है
उसके सामने  बड़े बड़े बहादुर भी नर्तक बनेंगे.