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हास्य कविता -फ्लॉप ब्लोगर और हिट कवि


एक कवि पहुंचा ब्लोगर के घर और बोला
‘यार, कवि सम्मेलनों में होने लगी है
हुटिंग ज्यादा
मुझे किसी ने अंतर्जाल पर जाकर
अपनी कविता की दुकान सजाने का
आइडिया सुझाया
तो मुझे तुम्हारा नाम याद आया’

ब्लोगर बहुत खुश हुआ
उसने सोचा अब तक मिलती थी
उनचास टिप्पणियां
अब पचास का जुगाड़ खुद मेरे पास आया
तत्काल उसे कम्प्यूटर के सामने बिठाकर
अंतर्जाल पर काम करने का
पूरा आइडिया समझाते हुए
उसका भी एक ब्लोग बनवाया
जाते-जाते कवि गुरूदक्षिणा में
कवि ने दिया ज्ञान
‘क्या यह अगड़म-बगडम लिखते हो
कुछ कवितायेँ और कहानियां लिखा करो
अपनी हिन्दी के ज्ञान का विस्तार करो
जिसकी वजह से इतना तुमने नाम पाया’

ब्लोगर ने बाँध ली कवि की बात गाँठ बांधकर
जुट गया साहित्य सृजन में
पर होता गया फ्लॉप
रचनाएं तो बहुत होने लगीं
टिप्पणियां होती गईँ कम
फिर भी वह लिखने से बाज नही आया
एक दिन पहुँचा कवि के घर
और बोला
‘बहुत दिन से न तुम्हें देखा
न तुम्हारा ब्लोग
जो तुमने मुझसे बनवाया ‘

कवि ने उसे अपना ब्लोग दिखाया
और बोला
‘तुमसे बनाने के बाद मैंने
ब्लोग को छद्म नाम से बनाया
क्योंकि चुराई हुई कविताओं के लिए
मैं तो पहले ही बदनाम था
उससे बचने का यही रास्ता नजर आया
देखो मेरे नाम पर पुरस्कार भी आया’
ब्लोगर ने देखा कवि का ब्लोग
उसमें कवि के कतरनों के नीचे
उसकी कविताओं के ही अंश लगे थे
जिनमें कवि ने जोडा था अपना नाम
जिनमें पचास-पचास से
ज्यादा कमेन्ट जड़े थे
फिर कवि ने दिखाए
दूसरे ब्लोग
उनमें भी टिप्पणियों में
ब्लोगर की कविताओं की छबि थी
उसने कवि से कहा
‘यहाँ भी तुम बाज नहीं आये
मेरी कतरन से हिट पाए
तुम्हारे रास्ते पर चलाकर मैं
तो हो गया फ्लॉप ब्लोगर
तुमने मेरी रचनाओं से ही
इतना बड़ा पुरस्कार पाया’

कवि घबडा गया और बोला
‘यार, मैं क्या करता
मैंने तो अखबार की कतरनों और
तुम्हारी कविताओं के अंशों से ही काम चलाया
यही आइडिया मेरी समझ में आया
अब तुम किसी और से मत कहना
मेरी जिन्दगी में तो पहला
पुरस्कार आया’

ब्लोग वहाँ से निकल बाहर आया
और आसमान में देख कर बोला
‘अजब है दुनिया
मैं कवितायेँ लिखकर हिट से
फ्लॉप ब्लोगर हो गया
और वह ब्लोग मेरी कवितायेँ लिखकर
हिट कवि कहलाया’

हास्य कविता -भूल गया अपना ज्ञान


एक बुद्धिमान गया
अज्ञानियों के सम्मेलन में
पाया बहुत सम्मान
सब मिलकर बोले दो ‘हम को भी ज्ञान’
वह भी शुरू हो गया
देने लगा अपना भाषण
अपने विचारों का संपूर्णता से किया बखान
उसका भाषण ख़त्म हुआ
सबने बाजीं तालियाँ
ऐक अज्ञानी बोला
‘आपने ख़ूब अपनी बात कही
पर हमारी समझ से परे रही
अपने समझने की विधि का
नहीं दिया ज्ञान

कुछ दिनों बात वही बुद्धिमान गया
बुद्धिजीवियों के सम्मेंलन में
जैसे ही कार्यक्रम शूरू होने की घोषणा
सब मंच की तरफ भागे
बोलने के लिए सब दौडे
जैसे बेलगाम घोड़े
मच गयी वहाँ भगदड़
माइक और कुर्सियां को किया तहस-नहस
मारे एक दूसरे को लात और घूसे
फाड़ दिए कपडे
बिना शुरू हुए कार्यक्रम
हो गया सत्रावसान
नही बघारा जा सका एक भी
शब्द का ज्ञान
स्वनाम बुद्धिमान फटेहाल
वहाँ से बाहर निकला
इससे तो वह अज्ञानी भले थे
भले ही अज्ञान तले
समझने के विधि नहीं बताई
इसलिये सिर के ऊपर से
निकल गयी मेरी बात
पर इन बुद्धिमानों के लफडे में तो
भूल गया मैं अपना ज्ञान

हास्य कविता -कवि सम्मेलन में पहुंचा जब ब्लॉगर (hasya kavita-hindi kavi sammelan mein hindi blogger)


एक कवि सम्मेलन में मंच पर
पहुंच गया ब्लोगर
लोगों ने समझा कोई नया कवि आया
सबकी पुरानी कवितायेँ झेलते हुए
उसको सुनने के इन्तजार में बिताया
आख़िर उसके मित्र कवि संचालक ने
उसे भी कविता सुनाने के लिए बुलाया
‘और कहा कि आज हम सुनेंगे
अंतर्जाल के महान कवि जो बहुत हिट हैं
नए जमाने में पूरी तरह फ़िट हैं ‘
ब्लोगर ने गला किया साफ और
सुनाने लगा वहीं सुनाई गयी
कविताओं के अंश
साथ मे रखता ‘बहुत बढ़िया’
और ‘बहुत सुन्दर’ जैसे शब्द
लोग चीखने और चिल्लाने लगे
और पूछने लगे
‘कैसा है ब्लोगर यहीं की कवितायेँ
फिर हमें सुनाता है और
अपने दो शब्द चिपकाता है’

ब्लोगर बोला
‘ यह ठीक समझो कि
यहाँ कुछ पंक्तियां लेकर
कमेंट लगा रहा हूँ जैसे
वहां करता हूँ
अगर पूरी की पूरी पोस्ट ही लिंक कर देता
तो तुम्हारा क्या हाल होता
सोचो तुम्हारा कितना समय बच जाता है ‘

लोग हल्ला मचाने लगे
कवियों ने उसे किसी तरह वहाँ से हटाया
वह अपने मित्र से बोला
‘कैसे लोग हैं ज़रा भी तमीज नहीं है
कितना हिट हूँ मैं वहां
यहाँ हूट कर दिया
नहीं जानते कि कैसे
ब्लोगर का सम्मान किया जाता है’

कवि मित्र बोला
‘इतनी जल्दी घबडा गये
हमारे साथ रोज ही ऐसा हादसा पेश आता है
तुम खुश किस्मत हो कि
तुम्हारे कंप्यूटर से कोई बाहर नही आता है’
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हास्य कविता -अल्पज्ञानी और कौवा


तीन मित्र पहुंचे एक पहुंचे हुए
सिद्ध के पास लेने ज्ञान
और बोले
‘महाराज ज़िन्दगी से हैं हम परेशान
तमाम तरह के तंत्र-मंत्र किये
तमाम दरबारों पर मत्था टेका
पर हुआ नही कल्याण
हमारे मन को शांति मिले
कृपा कर ऐसा दें ज्ञान’

सिद्ध पुरुष ने तीनों को देखा और कहा
‘मैं कोई चमत्कारों का सौदागर नहीं
जो पल में कर दूं तुम्हारा कल्याण
पहले लूंगा तुम्हारा इम्तहान
फिर दूंगा जीवन का ज्ञान’

तीनों को दी कापी और पेन और कहा
‘इस पर कौवे पर निबंध लिखो
इसमें तुम्हारा लिखा हुआ ही
कराएगा परिचय दस मिनट में ही कि
कौन कितना बुद्धिमान’

तीनों ने दस मिनट में कापी लिखकर
दे दीं गुरू जीं के हाथ में
करने लगे वह उसकी जांच
एक ने लिखा
‘कौवे के बारे में मुझे कुछ भी
लिखना नही आता
मैं तो हूँ गंवार और अनजान ‘

दुसरे ने लिखा
‘कौवा है एसा पंछी
जिसकी सबसे होती है तीक्ष्ण दृष्टी
उस जैसा गुण पा ले
कभी दुख्नी न हो इन्सान’

तीसरे ने लिखा
‘कौवा काला, काली उसकी नीयत
सुबह उसकी आवाज सुन लें तो
पूरा दिन होते परेशान’

सिद्ध पुरुष ने फैसला दिया
‘कौवे के बारे में जो नहीं जानता
उस निरे अज्ञानी को और
जो उसमें दूरदृष्टि देखता है
उस परम बुद्धिमान को
मैं अपना शिष्य बनाऊंगा
जिसने कौवे में दोष देखे
दिखा उसमें एक भी गुण
उस अल्पज्ञानी को
मैं नहीं दे पाऊँगा कोई ज्ञान’

तीनों चले गए तो गुरुजी के
पुराने और प्रिय शिष्य ने पूछा’
‘उस निरे अज्ञानी से तो वह ठीक था
कुछ लिखना-पढना तो जानता था
उसे भी अपना शिष्य बना लेते
कृतार्थ करते उसे देकर ज्ञान’

सिद्ध पुरुष ने कहा
‘उसे अपने अक्षर ज्ञान का था अहंकार
सब विषय में पढा पर उसका था अभिमान
इसलिये रह गया अल्पज्ञानी
पर उस अपढ़ अज्ञानी को यह मालुम है कि
नहीं है इसके पास नहीं कोई ज्ञान
वह लगन से सीखेगा
बुद्धिमान पर तो होगी थोडी मेहनत
पर उस अल्पज्ञानी पर
पूरी जिन्दगी गुजार देता
फिर भी नहीं होता उसे ज्ञान
सदैव अहंकार में डूबा रहता
थोडा सीखता ज्यादा दिखाता
दोष दूसरों में देखे
नहीं होता कभी उसे अच्छाई का भान
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सामाजिक सीरियल या हारर शो


बाप ने बेटे को दी कई बार
अपने पास आने के लिये जोर से आवाज
पर उसने लगा था कानों में इयर फ़ोन
और कोई नही दिया जवाब
फ़िर को प्यार से नाम लेकर  बुलाया
पर उसने भी नहीं सुन पाया
दोनों अपनी किताब पढने में मशगूल थे
दूसरे कमरे में जोर से टीवी
चला रखा था दादी और मां ने
कोई शांति में भी शोर महसूस कर रहा था
तो कोई शोर को  ही बैठा था शांति माने

पिता उठे और जाकर बेटे की
पीठ पर धौल जमाई और बोले
‘पढ रहे हो या हमें ही लगे हो चलाने
गाने सुन रहे हो पढ्ने के  बहाने
हमने भी किये हैं
अपने छात्र जीवन में ऐसे ही कारनामे’
पुत्र ने कान से  इयरफ़ोन निकाला और कहा
‘यह तो उधर चल रहे टीवी से आ रही
भयानक आवाजों से बचने के लिये है
जो चला रखा है दादी और मां ने
आप तो उधर दूर बैठे हो
सास-बहु के सीरियलों की आवाज को
झेल कर बता दो  तो जाने’
पिता ने बेटी की तरफ़ देखा
वह कान में से रुई निकाल कर बोली
”पापा  आप मुझे भी इयरफ़ोन लाकर दो
मैं भी कान में लगाकर गाने सुनुंगी
मम्मी दादी तो रोज
चलाकर बैठ्ती हैं सास बहु के सीरियल
हम नही सुन सकते उसकी भयानाक आवाज्
अगर हो सके तो हमारे लिये ऐक नया टीवी
बाजार से ला दो
हम अपने मनपसंद कामेडी सीरियल देखेंगे
अब हम बच्चे भी हो गये हैं सयाने’

पिता ने कहा
‘तुम्हारी दादी और मां तो
बडे चाव से देखती है
तुम्हारी समझ में नही आते
तुम्हारी बुद्धि में कहीं कमी है
इससे तो लगते हैं यही मायने’

बेटे ने  कहा
‘हम आप के ही बच्चे है
ऐक घंटा क्या दस मिनट ही
यह सीरियल झेल कर बता दो
हम छोड देंगे अपनी मांगें
आवाजे हैं उसकी भयानक है
दृश्य हैं डरावने’

बेटी बोली
‘पापा सब ओरतें पहनतीं है
महंगे सूट और साडियां
सभी आदमी शानदार  कपडे
पहनकर आते है
पर सब चिल्लाते हैं और चीखते  हैं
भयानक ढंग से आंखे दिखाते है
हम लगते हैं घबडाने
हम कुछ नहीं जानते आप तो
किसी भी तरह हमारी मांगें माने’

पिता ने  मांगें मांग लेने की बजाय्
पुत्र की चुनौती स्वीकारी
और पहुंच गये कमरे में
सास्-बहु का सीरियल  देखने
अपनी शक्ति और शौर्य दिखाने
दो मिनट में ही उनका लगा दिल घबडाने’

लौट्कर वापस आये
और दोनों बच्चों को गले लगा लिया और बोले
बच्चों तुमने सच कहा है
सब्र से सब सहा है
इन सास-बहु के सीरियल को देखने से
तो अच्छा है हम तुम्हारी मांगें माने
सारा सेट चमकदार है
सब पहने है शानदार और महंगे कपडे
फ़िर भी भूतों जैसे करते हैं लफ़डे
इतनी भयानक आवाजे और दृश्य्
कौन कहता है यह सामाजिक हैं
हम तो इनहें हारर शो माने
तुमने साबित किया है कि
तुम लायक बाप के हो बेटी-बेटे सयाने
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