ओढ़ लेते हैं कभी कभी शैतान भी मौन-हिन्दी शायरी


शौहरत के शिखर पर वह बैठे हैं
नीचे आने से उनको डर लगता है,
उनके ऊंचे इंसान होने का वहम
बना हुआ है लोगों में
नीचे आने पर
अपने बौने चरित्र की पहचान होने से
उनका दिल घबड़ाने लगता है।
———-
साधु ही हमेशा मौन की राह नहीं अपनाते,
कसूरवार भी उसकी आड़ में अपने को छिपाते।
ओढ़ लेते हैं कभी कभी शैतान भी मौन
अपनी काली कारतूत पर साधुता की संज्ञा लिखाते।
———
केवल सर्वशक्तिमान पर यकीन करना,
बंदे को आज नहीं तो कल है
अपने ही कर्म का फल भरना।
जिसको नहीं अपनी जिंदगी पर यकीन
उनसे निभाने की क्या उम्मीद करना।
———-

कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: