कई लोग बेमन से साथ हो जाते हैं-कविता



मन भी एक कागज की तरह है
कई नाम लिख जाते हैं
धुंधलाने लगते हैं जब उसके रंग
नये खाली पन्ने लिखने के लिए
चले आते हैं
ख्यालों का कारवां जैसे-जैसे बढता जाता है
मन भी उसके साथ हो जाता है
जिंदगी की राह में
दूर तक साथ चलता है
वही हमसफर हो जाता है
मिलकर बिछड़ने वालों के चेहरे भी
मन की आंखों से धीरे-धीरे
धुंधलाने नजर आने लग जाते हैं

जिंदगी छोटी है पर
आदमी के कदम भी कहां बड़े हैं
रास्ते में भी कई इंसानी बुत खड़े हैं
लगते हैं सभी अपने जैसे
पर नीयत का भरोसा करें कैसे
जैसे हमारा ख्याल बदलता है
दूसरों के मन भी बदल जाते हैं

सपने में मचलता हो
या जागते हुए बहलता हो
अपने मन का क्या भरोसा
उस पर काबू रखना होता है कठिन
फिर दूसरों के मन साफ होने की
उम्मीद क्यों करते है
यह मन ही है जिससे लोग
अपनों से भी दूर हो जाते हैं
जिंदगी के सफर में साथ चलने वाले
कई लोग बेमन से साथ हो जाते हैं
——————————
दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • mehhekk  On जून 9, 2008 at 4:26 अपराह्न

    सपने में मचलता हो
    या जागते हुए बहलता हो
    अपने मन का क्या भरोसा
    उस पर काबू रखना होता है कठिन
    फिर दूसरों के मन साफ होने की
    उम्मीद क्यों करते है
    यह मन ही है जिससे लोग
    अपनों से भी दूर हो जाते हैं
    जिंदगी के सफर में साथ चलने वाले
    कई लोग बेमन से साथ हो जाते हैं

    chanchal man ki dasha bahut sahi bayan huyi hai,bahut khub,bas man ko kabu mein akhne ka mantra abhi pata nahii,bhagta hi rehta hai:)

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