प्रतिबंध के बाद लगाये शोएब अख्तर ने फिक्सिंग के आरोप


शोएब अख्तर पर अनुशासनहीनता के आरोप में पांच साल क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद तैंतीय वर्षीय इस खिलाड़ी का क्रिकेट कैरियर लगभग समाप्त ही है। मुझे उससे सहानुभूति है और अब तो उसने जिस तरह फिक्सिंग का मामला उछाला है उससे तो नहीं लगता कि उसकी वापसी इतनी आसानी से होगी।

क्रिकेट में फिक्सिंग का आरोप पाकिस्तान से विकेटकीपर बैटसमेन राशिद लतीफ ने सबसे पहले लगाया था और उसमें उसने भारतीय खिलाडियों का नाम लिया था। उस समय उसकी बात को भारतीय प्रचार माध्यमों ने यह कहते हुए तवज्जो नहीं दी कि हर पाकिस्तानी आमतौर से भारत का स्वाभाविक विरोधी होता है। देशभक्ति के डर के मारे किसी ने उसके बारे में अधिक नहीं लिखा मगर इसी दौरान न्यूजीलैंड के अखबार में भी भारतीय खिलाडि़यों पर फिक्सिंग का आरोप लगा तो फिर मामला लंबा खिंच गया। इस देश के लोगों की मानसिकता है कि अगर गोरे लोग गलत बात भी कहें तो उसे सही मानेंगे। बहरहाल उस समय हमने राशिद लतीफ के आरोपों को बहुत गंभीरता से लिया था क्योंकि हम तब भी जानते थे कि भले ही पाकिस्तानी हर तरह से भारत के विरोधी हों पर क्रिकेट के मामलें वह हमेशा दोस्ती निभाते हैं-भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी भी अब तक यही दावे करत रहेे हैं।

आज अखबार में भारतीय क्रिकेट टीम के दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 76 रन पर ढेर होने के समाचार प्रमुखता से छपा था तो शोएब का यह आरोप भी कि उसे भारत में मैच फिक्स करने के लिये प्रस्ताव दिया गया था, इसे भी प्रथम पृष्ठ पर छापा गया था। कल किसी टीवी चैनल पर मैने यह समाचार नहीं देखा था पर आज अखबार में उसका आरोप देखकर मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। एक तो यह कि उससे उसकी रोजीरोटी छीनी गयी है तो उसको गुस्सा आना स्वाभाविक है। दूसरे यह कि उस पर लगे आरोप ऐसे नहीं थे जिस पर उसे इतनी बड़ी सजा मिलती। वैसे भी पाकिस्तान के क्रिकेट अधिकारी कौन दूध के धुले हैं जो इतनी कठोरता दिखा रहे हैं।

शोएब अख्तर के आरोपों पर अपने देश में कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं क्योंकि इस बार देशभक्ति का कार्ड नहीं चलेगा। आखिर उसे इस देश की ही एक टीम में जगह दी गयी थी जहां प्रवेश होने से पहले ही उसकी विदाई हो गयी। जब इस देश के क्रिकेट के कर्णधार किसी पाकिस्तानी को यहां की किसी टीम में शामिल करते हैं तो फिर उसके कहे पर किसी के सवाल करने पर उसे देशभक्ति की घुटी नहीं पिला सकते।

किसी समय हम क्रिकेट के लिये हद दर्जे के दीवाने थे। कई रातें और दिन खराब किये। जब एक के बाद एक इस खेल पर फिक्सिंग के आरोप लगे तो हमारा मन खराब हो गया। कई खिलाडि़यों ने एक दूसरे पर आरोप लगाये तो कुछ पर प्रतिबंध भी लगे। आज क्रिकेट को लेकर न तो कोई आकर्षण है और न इसके प्रति कोई देशभक्ति का भाव है। यही सचिन जब बल्लेबाजी करता था तो अपने सारे काम छोड़कर हम घर में ही जम जाते थे और आज हालत यह कि टीवी और अखबारों से ही पता पड़ता है कि उसने कोई कारनामा किया है। शोएब अख्तर के आरोप पर आगे भी बहस होगी। अगर उसकी टीम में वापसी हो जाती है तो ठीक नहीं तो वह अपने आरोपों को आगे बढ़ाकर वह सनसनी फैला सकता है। हो सकता है यह नाटक हो केवल क्रिकेट को खबरों के बनाये रखने के लिये। जिस तरह पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री ने शोएब के बारे में वहां के क्रिकेट अधिकारयों को उसको दी गयी सजा पर पुनर्विचार करने को कहा है उससे तो लगता है कि वह बहाल भी सकता है। सब जानते हैं कि किसी देश के प्रधानमंत्री के ऐसे संदेशों का टाल पाना व्यवसायिक रूप ले चुके इस खेल के कर्णधारों के लिये कठिन होता है। यह भी हो सकता है कि वहां के प्रधानमंत्री की जनप्रिय मामलों में सक्रियता दिखाने के लिये यह मामला बनाया गया हो। तब तक शोएब अख्तर ने यह मामला उठाकर सनसनी फैला दी । अपनी वापसी पर वह ऐसे ही चुप हो जायेगा जैसे राशिद लतीफ चुप हो जायेगा। देखना यह है कि यह मामला किस तरह आगे बढ़ता है। एकदम कुछ कह पाना कठिन है क्योंकि क्रिकेट में सब कुछ चलता है यार!

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