नाम, छद्मनाम और अनाम (२)


अंतर्जाल पर अनाम और छद्मनाम वाले लोगों का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं होना चाहिए। जबसे मैंने ब्लोग लिखना शुरू किया है तब से तो यही लगता है की यहाँ अनाम और छद्म नाम के दोस्त भी होंगे और विरोधी भी-और आज मुझे लगता है कि इस हिन्दी ब्लोग जगत में मेरा पहला स्वागत करने वाले भी वहीं हैं। अनाम और छद्म नाम के ब्लोगर यहाँ हमेशा रहेंगे ही क्योंकि हिन्दी ब्लोग की शुरूआत ही ऐसे लोगों ने की है जिनके अपने नाम कई कारणों से छद्म रखने पड़े।

अपने अन्वेषण से मैंने एक बात जान ली है कि कुछ हिन्दी ब्लोगर चार- पांच वर्षों से अधिक समय से यहाँ सक्रिय हैं। मैंने एक ब्लोगर की चार-पांच वर्ष पुरानी पोस्ट देखी जिसमें वह हिंदो ब्लोग जगत की धीमी प्रगति पर बहुत निराश था। एक ब्लोगर मुझे कमेन्ट दे गया और मैं उसके ब्लोग पर गया तो देखा उसके यहाँ तीन वर्ष पूर्व रोमन लिपि में लिखा रखा हुआ है। मैं हिन्दी के टूल का पता उसके ब्लोग पर रख कर आया पर फिर उसका कोई जवाब नहीं आया। यहाँ कुछ ब्लोगर ऐसे हैं जिनके लिए ब्लोगिंग एक नशे की तरह है और वह इसे छिपाने के लिए ही अभी भी अपने वास्तविक नाम के साथ अनाम और छद्म नाम से विचरण करते हैं-ऐसा उनके कमेन्ट लिखने के स्तर से पता लगता है। उनके कमेन्ट किसी को बुरे लगे या अच्छे पर उनकी भाषाशैली उनके मंजे हुए ब्लोगर होने का संकेत देती है। ऐसे में अपने ब्लोग पर अनाम लोगों के आने से रोकना मुझे ठीक नहीं लगता।
शुरूआती दिनों में जब मैं नारद पर पंजीकृत नहीं था तब मैंने विश्व कप क्रिकेट के दौरान कुछ अपनी पोस्ट लिखी थीं जो सादा हिन्दी फॉण्ट में लिखी थी और नारद ने साईड में क्रिकेट महा कुंभ में उनको दिखा रहा था और उसी पर कई लोगों ने पढाई में नहीं आने की शिकायत की थी। तब एक छद्म नाम की एक ब्लोगर के कहने पर जब मैंने यूनीकोड में लिखकर कवितायेँ लिखकर वर्डप्रेस के ब्लोग पर डाली। फिर क्रिकेट में एक वरिष्ठ खिलाड़ी की आलोचना करते हुए एक लेख लिखा। एक कमेन्ट लिखने वाले ने उस पर उस खिलाड़ी के लिए गालियाँ लिख दीं। में घबडा गया और उस पोस्ट को ही उडा दिया पर वहाँ से कापी कर दूसरे ब्लोग पर ले गया। वह भी नारद पर पहुंच गयी। फिर किसी अन्य ने भी उस पर और गन्दी गालियाँ लिखी तो मैंने फिर पूरी पोस्ट हटाई और तीसरी बार फिर पोस्ट की। आशय यह कि मुझे मालुम नहीं था कि उनकी कमेन्ट को कैसे हटाऊं।

उस दिन एक अनाम ब्लोगर एक कवि ब्लोगर द्वारा अपनी कमेन्ट हटाये जाने से नाराज होकर उसकी शिकायत कमेन्ट के रूप में लिख गए। मैंने भी जवाबी कमेन्ट लिखी कि आप मेरे यहाँ अवांछित टिप्पणी रख गए और इसे अब हटाऊं कैसे? अब इस समय लोग इसे पढ़ रहे होंगे। उसके बाद मैंने देखा कि यह विवाद बढ़ रहा है तब अपने दूसरे ब्लोगों पर मोड्रेशन लगा दिया। वह फिर आया और एक ऐसी पोस्ट की जानकारी दे गया जो उस दिन कमेन्ट मोड्रेशन के विरोध में लिखी गयी थी। उसने मेरी कमेन्ट भी पढी और फिर तीसरी कमेन्ट लिखने आया और बता गया कि आप चाहें तो कमेन्ट में ही जाकर मेरी कमेन्ट को कूड़ेदान में डाल सकते हैं। उस समय उसकी इस मासूमियत पर मुझे हंसी आई और अपने व्यवहार पर दुख भी हुआ पर जब मैं उसके कमेन्ट पर गया तो वहाँ कूड़ेदान देखा पर उसकी कमेन्ट नहीं हटाई पर अपने ब्लोगों से मोड्रेशन जरूर हटा दिया।

हम ब्लोगर यह समझते हैं कि हम सब जानते हैं और दूसरे भी। दोनों गलत हैं। कमेन्ट के लिए मोड्रेशन रखने की जिद या उसका विरोध दोनों ही निरर्थक हैं।
अनाम और कोई नहीं अपने बीच से ही ब्लोगर हैं और वह इस विधा के बारे में जानते हैं। हाँ वह अधिक कमेन्ट लिखकर एक्सपोज नहीं होना चाहते होंगे। फिर अनाम लिखकर वह रोचकता भी पैदा करते हैं और उनको लगता है कि वास्तविक नाम से वह ऐसा करेंगे तो उनकी छवि खराब होगी। मैंने एक विवाद में जमकर हास्य कवितायेँ लिखीं थी तब मुझे उकसाने और धमकाने वाले अनाम ही थे। मुझे उनकी चिंता बिलकुल नहीं थी क्योंकि मुझे लगा कि जो छिपकर समर्थन करते हैं उनका भरोसा क्या और विरोध करते हैं उनसे डरना क्या? कई बार तो अनाम ऐसे भी आते हैं कि लगता है कि इतनी सहज कमेन्ट पर अनाम रहने की जरूरत क्या है?

मैंने तो अपने सभी ब्लोग से मोड्रेशन हटा दिए हैं (हालांकि वर्डप्रेस के ब्लोग कभी-कभी इसके बावजूद मोड्रेशन के लिए लिए मेरा इन्तजार करते हैं) वजह जिसकी कमेन्ट अपने को प्रतिकूल लगेगी उसको कूड़ेदान में डाल देंगे। इसलिए सामूहिक रूप से तो मोड्रेशन का अधिकार रखने फैसला करने की बजाय यह फैसला करना चाहिए कि ऐसी किसी हटाई गयी कमेन्ट के लिए किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समर्थन नहीं देंगे। अगर किसी ने यह अधिकार रखा हुआ है तो यह भी नहीं मान लेना चाहिए कि उसने जानबूझकर अपने पास रखा है। मैंने अनाम ब्लोग के कहने पर जो मोड्रेशन विरोधी पोस्ट देखी थी उसमें ऐसे ही फैसले का जिक्र था और मैं उससे असहमत था।

फिर हम अंतर्जाल को ब्लोग या फोरमों तक ही सीमित होकर क्यों देख रहे हैं? आम पाठक भी तो आ सकते हैं जहाँ तक पहुंचना हमारा मकसद है? अनाम कमेन्ट से कैसा भय? क्या कोई गालियाँ दे जायेगा, और लोग उसको पढ़कर हँसेंगे? जहाँ तक मैं समझता हूँ कि अनाम ब्लोगर कभी प्रतिकूल कमेन्ट लगाते हैं पर गालियाँ देने की घटनाएँ इक्का-दुक्का हुईं हैं। केवल ऐसी घटनाओं से डर कर हम इतने बडे हिन्दी ब्लोग जगत में कैसा सन्देश दे सकते हैं। क्या हम उनकी वजह से अपनी दिशा बदल देंगे। इतना तय है कि यह अनाम ब्लोगर ही होते हैं और भाषा शैली के हिसाब से पहचाने जा सकते हैं। हालांकि समय और मनस्थिति के हिसाब से थोडा बदलाव आता है पर मूल स्वरूप कभी नहीं बदल सकता। मैं अनेक ब्लोग पर इन अनाम कमेन्ट देखता हूँ तो अनुमान करने की करता हूँ कि कौन हो सकता है? फिर सोचता हूँ कि मुझे उनके मजे लेने में क्यों बाधा डालनी चाहिए? मैं उनको डरपोक भी नहीं मानता क्योंकि ऐसा लगता है कि वह अपने वास्तविक नाम के साथ छद्म और अनाम रूप में भी ब्लोग का नशा करने के आदी हो चुके हैं।

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टिप्पणियाँ

  • समीर लाल  On मार्च 27, 2008 at 5:43 अपराह्न

    कभी आदमी छ्द्म नाम से अपने असली विचार रखने में सफल रहता है,,वरना बनावट आडे आ जाती है. सही है..सबकी अपनी शख्सीयत है..चलने दिजिये. 🙂

  • अनूप शुक्ल  On मार्च 27, 2008 at 6:06 अपराह्न

    अनाम लोग महान हैं। उनकी महानता को नजरान्दाज नहीं करना चाहिये।

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