मनुस्मृति:दूसरे के जूते नहीं पहनना चाहिये


1.जिस कार्य को करने से प्रत्यक्ष रूप में अच्छा फल नहीं मिलता हो उसे करने का प्रयास नहीं करना चाहिए, अंजलि में पानी नहीं पीना चाहिए, भोजन को गोद में रखकर नहीं खाना चाहिए और बिना प्रयोजन वार्तालाप नहीं करना चाहिऐ.

2.नाचना-गाना, वाद्य यंत्र बजाना, ताल ठोंकना, दांत पीसकर बोलना और अनुरक्त होकर गधे के जैसा शब्द नहीं बोलना कहिये.

3.अपने पैर कभी साँसे की धातु से बने पात्र नहीं धंसाने चाहिए तथा अपने विरोधी के घर में भोजन चाहिए.

4.उन पदत्राणों (जूते, चप्पल आदि), वस्त्रों, मालाओं, यज्ञपवीतों, जेवरों फूल-मालाओं और कमंडलों का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए जिन्हें दूसरों ने उपयोग किया हों


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

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टिप्पणियाँ

  • Isht Deo Sankrityaayan  On दिसम्बर 22, 2007 at 7:18 पूर्वाह्न

    भाई इन सूक्तियों का संदर्भ-प्रसंग भी तो जरा स्पष्ट करिये.

  • दीपक भारतदीप  On दिसम्बर 22, 2007 at 8:03 पूर्वाह्न

    इष्ट देव जी
    यह मनु स्मृति से लिया गया सन्देश है और इसके लिए किसी प्रसंग आदि लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, महापुरुषों के सन्देश मैं अपने स्वाध्याय के लिए लिख कर अपने पाठकों से बांटना चाहता हूँ और इनके लिए प्रसंग गढ़ कर लिखने से कोई लाभ नहीं है,
    दीपक भारतदीप

  • Himanshu singh  On नवम्बर 24, 2010 at 11:50 पूर्वाह्न

    Manu was agreat man but he was obiously a human.

  • bharat  On मार्च 5, 2011 at 1:13 पूर्वाह्न

    bharat ki barbadi ki vajah manu he,

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