रावण तुम कभी मर नहीं सकते-कविता


रावण तुम कभी मर नहीं सकते
क्योंकि तुम्हारे बिना राम को लोग
कभी समझ नहीं सकते
बरसों से जला रहे हैं तुम्हारे पुतले
तुम्हारे दोषों को गिनाते हुए
हर बार तुम्हारी बरसी पर
रामजी जैसे बनने की सौगंध खाते हैं
पर तुम्हारा पुतला फूँकने के बाद भूल जाते हैं
रामजी की भक्ति करने की बजाय
तुम्हारे जैसे सुखों की तलाश में जुट जाते हैं
भक्ति के लिए बैठने की बजाय
तुम्हारी तरह माया के पीछे
दौड़ने में ही वह सुख पाते हैं
तुमने जो भेजा था मारीचि को
सोने का मृग बनाकर
सीता को भरमाने के लिए
राम तो जानते हुए उस छल में फंसे थे
रामजी का बाण खाकर वह भी
हुआ ऐसा अमर कि
पूरी दुनिया के लोग जानते हुए भी
मृग- मारिचिका में फंसने से ही मौज पाते हैं
युद्ध में रामजी का बाण खाकर
उनका दर्शन करते हुए प्राण त्यागते हुए
तुमने पाया है अमरत्व
रामजी का तो लोग लेते हैं नाम
मार्ग तो तुम्हारे ही पर चलते जाते हैं
———————————

समस्त पाठकों को दशहरा पर्व की बधाई-दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • deepak verma  On अक्टूबर 10, 2008 at 10:49 पूर्वाह्न

    ise padhane ke baad kutch bolne ke liye sabda hi nahi mile .sayad yaha satya hai.

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