हास्य कविता -आदमी की पहचान


हाथी के दांत खाने के और
दिखाने के और होते हैं
पर भला और बेजुबान जीव
अपनी असलियत किसी से छिपाता नहीं
फ़िर क्यों उसके प्रवृतियों की
चर्चा आदमी से करते हैं
जिसकी नीयत के दांत तो
सांप के जहर से भी ज्यादा
विषैले होते हैं
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होती है कुछ लोगों को
अपनी रचना पर गलतफ़हमी
जो उन्होने रचा है वही
सबसे है अच्छा
खाते हैं ऐसे ही लोग
कदम कदम पर गच्चा
कोई तारीफ़ न करे तो
जोर-जोर से चिल्लाते हैं
और करे तो गरियाते हैं
अपने अहंकार में खो देते हैं
 मानसिक संतुलन
पहचान नहीं पाते
कौन झूठा कौन सच्चा
ऐसे लोगों पर यकीन करना होता कठिन
चरित्र होता है उनका कच्चा
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