हिंदूओं की ताकत है ध्यान और गीता का ज्ञान (shri mdadbhagawat gita’s gyan and Dhyan is power of hindu dharma-hindi lekh)


                   मैं देश में चल रहे माहौल को जब देखता हूँ जिसमें हिदू धर्म के प्रति लोगों के मन में तमाम विचार आते हैं पर उनका कोई निराकरण करने वाला कोई नहीं है। धर्म के नाम पर भ्रम और भक्ती के नाम पर अंधविश्वास को जिस तरह बेचा जा रहा है, वह चिंता का विषय है । विरोध करने पर आदमी को नास्तिक और तर्क देने पर कडी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है।

            हिंदू धर्म की को पूरी दुनिया सम्मान की द्रष्टि से देखती है पर अपने ही देश में धर्म के ठेकेदोरों ने लोगों की बुध्दी का दोहन केवल अपने तुच्छ स्वार्थों की खातिर कर इसको बदनाम कर दिया। हिंदू धर्म के तमाम ग्रंथ हैं और उनमें कुछ ऎसी तमाम बातें है जो उस समय ठीक थीं जिस समय वह कहीं और लिखी गयी थीं, समय के साथ लोग उनसे बिना कहे दूर होते गये। पर जीवन के आर्थिक, सामाजिक , स्वास्थ्य और विज्ञान की दृष्ट से जितना हमारे ग्रंथों में हैं उतना किसी अन्य धर्म में नहीं है। हाँ, इस धर्म को बदनाम करने के लिए इसके विरोधी केवल उन बातों को ही दोहराते हैं जो किन्हीं खास घटनाओं या हालतों में लिखीं गयी थीं और आज अप्रासंगिक हो गयी हैं और लोग उन्हें अब दोहराते ही नहीं है।

                अब आप लोग कहेंगे कि इतनी सारी पुस्तकों के कारण ही हिंदु धर्म के प्रति भ्रांति फैली है तो मैं आपको बता दूं कि सारे ग्रंथों का सार श्री मद्भागवत गीता में है। जिसने गीता पढ़ ली और उससे ज्यादा समझ ली उसे कुछ और पढने की जरूरत ही नहीं है। यहां में बता दूं मैं कोई संत या सन्यासी नहीं हूँ न बनूंगा क्योंकि गीता पढने वाला कभी सन्यास नही लेता । इस पर ज्यादा प्रकाश विस्तार से मैं बाद में डालूँगा , आज मैं ज्ञान सहित विज्ञान वाले इस ग्रंथ में जो भृकुटी पर ध्यान रखने की बात कही गयी है वह कितनी महत्वपूर्ण है-उसे बताना चाहूंगा । शायद भारत में भी कभी इस बात की चर्चा नही हुई कि हिंदु धर्म की सबसे बड़ी ताकत क्या है जो इतने सारे आक्रमणों के बावजूद यह बचा रहा है। अगर लोगों को यह लगता है कि हिंदू कर्म कान्ड भी धर्म का हिस्सा हैं तो मैं आपको बता दूं कि गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहीं भी कर्मकांड के महत्व की स्थापना नहीं की । उन्होने गीता में ध्यान के सिध्दांत की जो स्थापना की वह आज के युग में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। ध्यान वह शक्ति है जो हमें मानसिक और शारीरिक रुप से मजबूत करती है जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है।

             मैं अपने हिसाब से ध्यान की व्याख्या करता हूँ । मेरे इस ब्लोग को जो पढ़ें वह एक बात सुन कर चौंक जायेंगे कि मुझे इन्टरनेट पर ब्लोग लिखने की शक्ति इसी ध्यान से मिली है और प्रेरणा गीता से। ध्यान क्या है पहले इस बात को समझ लें । हम सोते हैं और नींद लग जाती है तो लगता है आराम मिल गया पर आजकल की व्यस्त जिन्दगी में तमाम तरह के ऐसे तनाव हैं जो पहले नहीं थे । पहले आदमी सीमित दायरे में रहते हुए शुध्द चीजों का सेवन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे और उनकी चिताएँ भी सीमित थीं इसीलिये उनका ध्यान नींद में भी लग जाता था । शुध्द वातावरण का सेवन करने के कारण उन्हें न तो ध्यान की जरूरत महसूस हुई और न गीता के ज्ञान को समझने की। हालांकि मैं अपने देश के पूर्वजों का आभारी हूँ कि उन्होने धार्मिक भावनाओं से सुनते-सुनाते इसे अपनी आगे आने वाली पीढी को विरासत में सौंपते रहे ।

               आज हमारे कार्य के स्वरूप और क्षेत्र में व्यापक रुप से विस्तार हुआ है और हम अपने मस्तिष्क के नसों को इतनी हानि पहुंचा चुके होते हैं कि हमें रात की नींद ही काफी नहीं लगती और हम बराबर तनाव महसूस करते हैं । रात में हम सोते हैं तब भी हमारा मस्तिष्क बराबर कार्य करता है और वह दिन भर की घटनाओं से प्रभावित रहता है। ध्यान हमेशा ही जाग्रत अवस्था में ही लगता है । ध्यान का मतलब है अपने दिमाग की सर्विस या ओवेर्हालिंग । जिस तरह स्कूटर कार मोटर सायकिल फ्रिज पंखा एसी और कूलर की सर्विस कराते हैं वैसे ही हमें खुद अपने दिमाग की भी करनी होगी। एक तरह से हमें अपना साएक्रितिस्त खुद ही बनना होगा।

                   जिस बात का जिक्र मैंने शुरू में नहीं किया वह यह कि मैंने चार वर्ष पूर्व किसी अखबार में पढा था कि एक अमेरिकी विज्ञानिक का मत है कि हिंदूओं कि सबसे बड़ी ताकत है ध्यान । फिर भी भारत के प्रचार माध्यमों ने इसे वह स्थान नहीं दिया जो देना चाहिए था । यहां मैं ध्यान की विधि बताना ठीक समझता हूँ । सुबह नींद से उठकर कहीं खुले में शांत स्थान पर बैठ जाएँ और पहले थोडा पेट को पिच्काये ताकी हमारे शरीर में से वायू विकार निकल जाएँ और फिर नाक पर दोनों ओर उंगली रखकर एक तरफ से बंद कर सांस लें और दूसरी तरफ से छोड़ें। ऐसा कम से कम बीस बार करें और दोनों तरफ से सांस लेने और छोड़ने का प्रयास करें । उसके बाद बीस बार अपने श्री मुख से ॐ शब्द का जाप करे और फिर बीस बार ही मन में जाप करें और धीरे अपने ध्यान को भृकुटी पर स्थापित करें। जो विचार आते हैं उन्हें आने दीजिए क्योंकि वह मस्तिष्क में मौजूद विकार हीं हैं जो उस समय भस्म हो रहे होते हैं। यह आप समझ लीजिये । धीरे धीरे अपने ध्यान को शून्य में जाने दीजिए-न जा रहा है तो बांसुरी वाले के स्वरूप को वहन स्थापित करिये -धीरे स्वयं ही आपको ताजगी का अहसास होने लगेगा । अपने ध्यान पर जमें रहें उसे भृकुटी पर जमे रहने दीजिए ।

                 ऐसा नहीं है कि केवल सुबह ही ध्यान किया जाता है आप जब भी तनाव और थकान अनुभव करे कहीं भी बैठकर यह करें। शुरूआत में यह सब थोडा कठिन और महत्वहीन लगेगा पर आप तय कर लीजिये कि मैं अपने को खुश रखने के लिए यह सब करूंगा ।कुछ लोग इसे मजाक समझेंगे पर यह मेरा किया हुआ अनुभव है। अगर मैं यह ध्यान न करूं तो इस तरह कंप्यूटर पर काम नहीं कर सकता जिस तरह कर रहा हूँ। कम्प्युटर, टीवी और मोबाइल से जिस तरह की किरणें उठती है उससे हमारे दिमाग को हानि पहूंचती है यह भी वही वैज्ञानिक बताते हैं जिन्होंने इसे बनाया है। शरीर को होने वाली हानि तो दिखती है पर दिमाग को होने वाली का पता नहीं लगता। ध्यान वह दवा है जो इसका इलाज करने की ताक़त की रखता है। शेष अगले अंकों में। इस तरह की रचनाये पढ़नी है वह मेरे नीचे लिखे ब्लोग को देखते रहे वहां मैं इन पर लिखता रहूँगा।

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टिप्पणियाँ

  • nitesh sharma  On अप्रैल 7, 2009 at 10:08 अपराह्न

    mujhe dhyan kendrit karne ki tarkib bataiye

  • GULABRAI  On अप्रैल 9, 2009 at 1:49 अपराह्न

    dear sir hum janna chate ki hum hapne man ko ko kis tarah kabu rake kiye ki agar hum dhyan karna chate hai to bhi nahi kar pathr hai kripa hamara app sama dhan kare ki kis tarah se hum apne apko man ko roke our kese dyan kare jab ki man siraf sex ki our le jatha hai our hamare pure body me to siraf sex hi bhara hu hai age 65 ki hai jab ki is age me ye sab kutch nahi hona chaiye pl rep yr faith fully gulabrai

    • Anil sharma  On अप्रैल 24, 2013 at 5:40 अपराह्न

      Abhyas se

    • sanjay singh chauhan  On जुलाई 23, 2015 at 6:19 अपराह्न

      प्रत्येक चीजो की एक लिस्ट बनाये की कब क्या करना है जैसे शाम के वक़्त घूमना ,सुबह के वक़्त एक निश्चित समय पर उठना और पूजा एवं ध्यान करना , रात के वक़्त सेक्स करना , पर ध्यान रहे की आपका सेक्स पूर्ण हो, जबतक मन करे सेक्स करे ,आप खुद को समय से बांध ले इससे होगा ये की आपको इसकी आदत हो जाएगी !!! और आदत ही हमें सब कुछ करवाती है आपको सेक्स की आदत/ लत हो गयी है ,अच्छी बात है सेक्स भी इंसान की चाहत है जरुरत नहीं क्योकि अगर जरुरत होती तो फिर ब्रम्ह्मचार्य न होता जगत में .उनलोगों ने ध्यान से सेक्स को जीत लिया और ध्यान को ब्रह्मचारियो ने आदत बना लिया !!!! मेरा कहना सिर्फ इतना है की सभी चीजो का एक समय होना चाहिए और उसे आदत बना ले …जैसे सुबह उठना जरुरत नहीं आदत होती है !! ध्यान को अपना आदत बनाये फिर देखिये सब ठीक हो जायेगा !!!!

    • Navaraj pdl  On अक्टूबर 11, 2015 at 9:08 पूर्वाह्न

      Jai ho..
      Jab aap dhan lagaakar apna man ko kaabu me lena chahate hai tab nahi hota bole aap thik hai nahi hota par 1 bar me nahi hoga avyas 3 month tak avyas howega to man kaabu me aayega..
      Aap jab dhan lagaate hai tab aap oom ka man se uchharan kijiye tab man kaabu me aayega ye mera anuvab hai….

  • rajesh soni  On जुलाई 6, 2009 at 10:27 अपराह्न

    aap ne bahut accha likha.

    please geeta sar ke bare me likhe,

    dhanywad

  • kundan kumar  On सितम्बर 21, 2010 at 11:57 पूर्वाह्न

    No comment

  • vikas kumar  On अक्टूबर 19, 2010 at 4:35 अपराह्न

    Apne jo vichar prakat kiye hein ve srahniy hein bhagwan aapoke madhayam se in vicharon ko parcharit karne mein aapki madad karien. Aapko hardik abhinandan avam dhero shubhkamnayien

  • pintoo  On दिसम्बर 13, 2010 at 4:59 अपराह्न

    dear sir,
    i need to be geeta gyan in hindi pls. sent me via mail

  • rahul  On जनवरी 23, 2011 at 9:05 अपराह्न

    mene aap ka blog read kiya , accha laga . vese me aapko batao me bhi dhan ke sakti ko samach chuka hon koiki me bhi is kriya ko karta hon.geeta ke bare me aur apne blog me likhte rahe. thank

  • Ram Narayan Ray  On अगस्त 11, 2011 at 2:39 पूर्वाह्न

    Ram Narayan Ray Janakpur Nepal Hal Saudi arab Riyadh

  • sagar chohan bihar  On सितम्बर 18, 2011 at 11:40 अपराह्न

    hame aap ka bichar aacha laga aap gita ke bare me likiy

  • Kamlesh kr Dhaundiyal  On अप्रैल 3, 2012 at 9:24 पूर्वाह्न

    Hare krishna Prabhu jii.
    mainy aapka blog pura pada bahut aacha likha hai. AAj ham apny hiii logno key karan thagy or chaly jaa rahy hai
    joo Dharm key naam per janta ko alag alag dhang sey chal rahy hain, is kaliyug main Bhawsager par karny ka kewal ek hee maha mantra hai
    Hare krishna, Hare krishna, krishna krishna hare hare
    Hare ram, Hare ram, ram ram hare hare

    Apka sewak”
    Hare Krishna

  • madhav roy  On सितम्बर 9, 2012 at 8:32 पूर्वाह्न

    aap jise logo k karan hi hindu dharm ka istitw bacha hai

  • Roy Madhav  On सितम्बर 9, 2012 at 8:34 पूर्वाह्न

    acha laga

  • randhir singh  On दिसम्बर 11, 2012 at 11:57 अपराह्न

    देखो मित्रो हमरी सबसे पुराणी भासा संस्कृत थी, उसमे भाई को बंधू कहते थे किसी के स्म्बोदन के लिए “हे”पर्योग करते थे, इस प्रकार यह बना” हे बंधू” यदि इसको बार बार बोले तो बनेगा हिन्दू |इसलिय दोस्तों आप सही रहा पर चले हिन्दू सबद हमरा है यह किसी और का नहीं है ………………………जय श्री राम ,hind u ko yadi latin greek me dunde to uska aarth hai………………..पिछले टांगो पर चलने वाले हो तुम .इस प्रकार मानव विकास में जो प्राणी सबसे पहले पिछली टांगो पर चला वह था हिन्दू ………………जय श्री रामहिन्दू “हे बंधू”जिसका आर्थ है अरे भाई ,{आजकल हम बिहार या उतर प्रदेश के मजदूरो को भैया कह कर संबोदित करते है } ” और hind u se bana hai . जिसका आर्थ है की पिछली टैंगो पर चलने वाला प्राणी .अब हमें सिन्धु ….अरबी आदि का साहरा न लेकर अपने संस्कृत का ही कारन बताना है .आज भी हम एक दुसरे को भाई ,भाई साब, हेल्लो ब्रोदर कहते है

  • ARUN KUMAR  On मार्च 13, 2013 at 3:37 अपराह्न

    I LIKE YOUR SEGGATION. BUT I FILL & SEE OFF ALL HUMAN THINK. DON’T ATTACH ON LIFE.

  • ARUN KUMAR  On मार्च 13, 2013 at 3:44 अपराह्न

    YOU SENT GOOD IDEAS & ON YOUR HURT GOD BLASE YOU ALL THINKING. SO MANY PEOPLE FILL DIFFERENT THINKS LIKE OUTPUT IN THE SAME TIME

  • Anil sharma  On अप्रैल 24, 2013 at 5:41 अपराह्न

    Gg

  • khaptad  On मई 10, 2013 at 9:06 अपराह्न

    very good writing.congs.

  • rishabh sachan  On जुलाई 7, 2013 at 8:23 अपराह्न

    GOOOD ONE…..i love my religion …………….jai shri ram

  • shri bhagwan sharma  On जुलाई 31, 2013 at 12:18 पूर्वाह्न

    Sir total age in kalyug .or current age in kalyug . Hre krishna hre krishna krishna krishna hre hre .hre ram hre ram ram ram hre hre

  • ranjan  On अगस्त 26, 2013 at 12:06 अपराह्न

    Sir mujhe batae ki dhyan kaise lagaya jae

    • Dharam das  On जनवरी 14, 2016 at 12:39 अपराह्न

      Dhyan ka matlab ekagrata he man ka lin hona dhyan he 1. saty ka acharan kare 2. satvik khorak le 3. bramchary ka palan kare fir dhyan ki bat ayegi iske bina kuch nahi hoga.
      1. Dhyan ka samay rat ke 1:00 am se subah 4:00 am ke bich rakhe.
      2. Bhumi pe kuch sutar ka vastr yaa kambal bicha ke padmasan me sidha tatar bethe
      3. pahle pranayam kare ek nak anguli se band karke dusri nak se lamba swas le fir us nak ko band karke dusri nak se ahista ahista nikale fir ek se swas le dusri se nikale esa 5 ya 10 minit kare
      4. ab anguthe se do netro(eye) ke bich ka bhag he vaha thoda presser kare aur usi jagah dhyan lagaye swas ahista aur lamba le 3-6 month me kuch khud anubhav karoge jyada jankari chahiye to SHIV SANHITA download karlo vedpuran.net per he aur khud padho. mera whatsapp 97258 17827 aur 98798 47422 he.

  • PANKAJ  On अगस्त 30, 2013 at 12:12 अपराह्न

    THANKS

  • Madnesh kumar gautam  On सितम्बर 22, 2013 at 7:29 पूर्वाह्न

    Hindu dharam sabase hae dharma hai krisana rademe gita

  • shubhamm bhardwaj  On दिसम्बर 30, 2013 at 1:53 पूर्वाह्न

    Bahut aacha sir…..aap dhyan k bare mai or btaye

  • ashok rajbhar  On फ़रवरी 18, 2014 at 12:15 अपराह्न

    very good sir…mujhe garv hai mai ek hindu du…

  • keshav  On मार्च 10, 2014 at 10:34 अपराह्न

    एक बात आप सभी पाठक बन्धुओं को बताना चाहूँगा की गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रन्थ है जिसमे संसार की साड़ी समस्याओं का एवं सभी प्रश्नों का समाधान है ,,
    गीता सारे धर्म ग्रंथो का निचोड़ है ,,
    सबसे अधिक ध्यान देने योग्य बात यह है की भगवान् श्री कृष्ण ने सच्चे संतो एवं व्रम्ह्निष्ठ पूर्ण गुरु की पहचान बताई है ..
    अगर समस्त हिन्दू भाई गीते को आधार मानकर गुरु की खोज करे तो कभी किसी की श्रद्धा ठगी नहीं जा सकती ..
    सच्चा संत दीक्षा समय ही अपने शिष्य को इश्वर के प्रकाश स्वरुप का दर्शन करवा देता है , दिव्या दृष्टि प्रदान करता है.
    यही दर्शन अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में किया था ,,
    अधिक जानकारी के लिए गीता का अध्यन करें

  • keshav  On मार्च 10, 2014 at 10:38 अपराह्न

    agar aap bhi geeta ke gyaan ka aadhar par, jivit rahte hue, sanyaas liye bina, prmatma ka darshan karna chahte hai to aise guru ke paas jaye jo aapko nishulk bramha gyaan pradaan kare aur turant apke ghat ke andar apko darshan karwa de

  • Dikshant kumar  On अप्रैल 23, 2014 at 10:55 अपराह्न

    Very gook!! Keep it up|

  • Ravinder nath Sharma  On जुलाई 21, 2014 at 7:38 पूर्वाह्न

    Khush Raho khush Rakho ! JAI SHRI KRISHANA ,

    • Ravinder nath Sharma  On जुलाई 21, 2014 at 7:58 पूर्वाह्न

      Gayaan banto tto Gayaan ki vridhi hogi, Aap Kai Gayaan ki Bhi Aur SAMAAJ kalyaan ki Bhi,Koi Bhi achee cheej MANUV kalyaan K liai sanjivani sai kum nahi hoti . Aap ke lakeh read ker anand ki anubhuti hoti hai , MUN ISHWER Kai liay bhagata hai , Khush Raho Khush Rakho sub ko .JAI SHRI KRISHANA

  • sanjay sidhant  On अगस्त 3, 2014 at 3:35 अपराह्न

    aap achaaha likhtey hain parntu isey jisey sabsey jyada padhana chaiye woe to sub bhrstchar myen lagey hain

  • krishna  On अगस्त 12, 2014 at 10:03 अपराह्न

    krishna karano ka karan hai issliye sab uski saran me jao….jo karo vo Vasudev bhagvan krishna ko samrpit karo

  • rahul kumar  On सितम्बर 28, 2014 at 8:48 अपराह्न

    dhyan kese karu jo mujhe sahi marg dikhaye me bhagvan bishnu ko pana chahata hu

  • rupam sinha  On अक्टूबर 16, 2014 at 12:03 अपराह्न

    Mujhe gita ki baaten bahut prerit karti hai magar mai kisi ki nafrat bari baton ya kisi ke negative pratikriya ya kabhi apne hi dukh par wichlit ho jaati hun jo mere liye hi nukssan deh hota hai mai kya karun samadha bataiye

  • anoop salaria  On दिसम्बर 20, 2014 at 10:43 अपराह्न

    sir hum hindu dharm se cast ko kase khatam kre

  • vaibhav mishra  On जनवरी 13, 2015 at 11:18 अपराह्न

    Up date me for ur post

  • rahul jaiswal faizabad u.p  On जनवरी 22, 2015 at 11:30 अपराह्न

    sahe hai dhayan karne se hame sante milte hai@ parfect@ seva se shivsena ledar faizabad ayudhya u.p

  • Sumit Bansal  On मार्च 25, 2015 at 6:54 अपराह्न

    parents name of brhama, vishnu, mahesh

  • skanda Gupta  On अप्रैल 14, 2015 at 11:04 अपराह्न

    aap ki her likhi hui Baat Maine padh aur mujhe ye bohot sahi laga aur aaj k jug main ye ati abassyak h.

  • samarth somwanshi  On मई 3, 2015 at 11:01 पूर्वाह्न

    yah lakhe sundar hai. shreemadgeeta yah duniya ka sbase badhiya granth hai.

  • kuldeep rajput  On मई 25, 2015 at 6:03 पूर्वाह्न

    mere man mai kaee tarah ke vichar aate hai yej kar loo to sahi hoa jab karta hu to thodi der bad sochta hu ki yeh galat hai phir socha hu ki sahi tha yeh kar lu to yej ho jayga vah kar loo to yesha no ho jaye mai samajh hi nahi pata hu ki mere liye Kul iya sahi hai Kul iya galt hai meri umar 40 saal ki ho gai hai mai aaj bhi yeh sovhta hu ki mai apna cerrer kiya banao

  • chandan kumar  On जून 11, 2015 at 1:00 पूर्वाह्न

    Bahut Bahut Dhanyavaad…….padh ki achcha laga…meri paratthna hai…..Aap aise likhte rahe

  • N K Sharma  On जून 20, 2015 at 4:36 अपराह्न

    gita ka swatantrata main yogdan batayen

  • bhagmal  On जून 26, 2015 at 12:41 अपराह्न

    आपके द्वारा ध्यान लगाने के जो विधि बताई गयी है वो बहुत ही अच्छी है आपका बहुत -बहुत धन्यवाद

  • Sulochana Joshi  On जुलाई 18, 2015 at 5:21 अपराह्न

    Aapne Sahi Likga hai* Dhyan ke Bare me likha hai Mai 32 Saaloan Dhyan marg me hoon Jaha Aatma Balvan hogi Mann Tann Mastish Balvan hogi Jai Sriram

  • dinesh  On अगस्त 21, 2015 at 11:43 पूर्वाह्न

    Sir! If i want to put your words exactly what you have written in Geeta ka Gyan in my facebook will you allow me to do that?

  • aishwarya  On अगस्त 21, 2015 at 9:21 अपराह्न

    nice but I want -swatantara sangram me Greta ki prerna

  • SHARWAN SINGH CHUNDAWAT  On सितम्बर 9, 2015 at 2:58 अपराह्न

    NICE

  • Sateesh sahu  On सितम्बर 10, 2015 at 9:24 पूर्वाह्न

    जीवन मेँ माता पिता से बढ़कर कोई चीज नहीँ है।
    “Sateesh”

  • आदीत्य रंजन  On अक्टूबर 12, 2015 at 9:03 अपराह्न

    AAAA

  • S K RAI  On नवम्बर 7, 2015 at 9:26 पूर्वाह्न

    Bhot acha likha he pane sir,likhte rahe aur hum subko kuch naya sikate rahe.

  • Achyut  On दिसम्बर 21, 2015 at 4:18 अपराह्न

    Hinduo ki takat tabhi barkarar rahegi jab we hamesa dharm pe chalenge

  • गौरव  On जनवरी 7, 2016 at 12:27 अपराह्न

    मेेे परेशान रहता हंू

  • blogger  On फ़रवरी 5, 2016 at 4:33 अपराह्न

    ध्यान करने के लिए प्रत्येक गाँव में “ध्यानालय” निर्माण करने चाहिए. और वहा लोगों को ध्यान-उपासना करने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. kindly visit at http://www.dharmmargdarshan.wordpress.com

  • sarvesh chitransh  On फ़रवरी 21, 2016 at 6:34 अपराह्न

    Geeta ek mahan granth h par jab ham ese gambheerta se padte h es k lye ham ko is m utarna padta h yani k jaise ham t.v.k kisi program m dubte h bilkul vaise h kya usse jyada doobna padta h tabhi maja aata h na ham kisi k n koi hamara jaisi halat hoti h aur parampita parmeswar k siva is jaha m koi nahi h aaj ke samay m b ham ko y samajna chahiye ki kahi kuch nahi h sirF parampita parmeswar k siva

  • Sai  On मार्च 7, 2016 at 11:22 पूर्वाह्न

    main kafi koshish karta hu par ho nahi pata,

  • phool singh ahirwar  On अप्रैल 8, 2016 at 11:04 अपराह्न

    Super hai

  • vikas roz  On अप्रैल 16, 2016 at 2:08 अपराह्न

    sir mera nam vikas he.or mujhe bahut pareshani he.mera man to bahut krta he dhyan krne ka but pareshaniyo ke karan man nhi lag pata.or bahut ajeeb ajeb man me bhav ate he jisse mujhe bahut ganda fill hota he isse mujhe dor hona he.

  • Sunil kumar  On अप्रैल 30, 2016 at 7:07 अपराह्न

    Mujhe dhyan lagane ki vidhi batae

  • rakesh  On मई 11, 2016 at 8:48 अपराह्न

    aise hi lage raho

  • ganesh  On मई 23, 2016 at 3:27 अपराह्न

    mujhe aapka blog bahut achcha laga’aap hindu dharam ke bare mein bhaiyo ko jankari de rahe hai jo ki puja aur dhayan se bhi jayda puny h aaj ki kalyug m’mein aapka sath h

  • jagarnath  On जून 13, 2016 at 9:51 अपराह्न

    Sri krishna

  • dinesh  On जुलाई 17, 2016 at 8:38 अपराह्न

    aap.ke.dwara.diye.huye.gyan.se.ham.bahut.santusht.hai

  • Sur Aur Shayari  On अक्टूबर 14, 2016 at 10:27 पूर्वाह्न

    ॥ जय श्री सांवलिया सेठ ॥ आज के दर्शन
    http://www.shreesanwaliyaji.com/blog/daily-darshan/sanwaliya-seth-darshan-14-10-2016

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