बंगलादेश पर जीत:अब अमृत पिलाने से क्या फायदा


आज मुझे सारा दिन फुर्सत नहीं थी, घर से दो काम लेकर निकला था तो रास्ते में चार करने पडे। अनिच्छा से मोबाइल लेकर घर से निकला था और वही मेरे लिए समस्या बन गया , घर से वहां फोन किया जाता था कि तुम यह काम भी करके आना और यह तुमसे कहना भूल गये थे । जैसे तैसे घर पहुंचे कि मोबाइल पर एक मित्र ने संपर्क कर कहा-” सुनो, तुम न इतने दिन से टीम इन्डिया की मजाक उडा रहे थे , देखो आज अपनी हार का बदला ले लिया।
“पहले तो हम चोंके, फिर ध्यान आया कि टीम इंडिया बंगलादेश गयी है और उसके विश्वकप के बाहर होने के बाद से परेशान मित्र को उसकी जीत का समाचार मिल गया होगा। फिर भी अनजान होने का अभिनय करते हुए हमने पुछा-” किससे बदला लिया हैं भई , ज़रा हमें भी बतलाओ ।
“वह बोला-” अच्छा जैसे तुम जानते ही नहीं हो । आज बंगलादेश को दुसरे वन-डै में हराकर टीम इंडिया ने सीरीज जीत ली।
“हमने कहा-“अरे यार, तुम्हें तो मालुम है कि मैंने क्रिकेट देखना छोड़ दिया है।
“वह मैं जानता हूँ।” वह बोला-” क्रिकेट देखना क्या शराब पीने की तरह है, जो कह रहे हो अब छोड़ दीं है।”
उसने फोन काट दिया वरना मैं उससे कहता कि कभी यह मेरे लिए शराब की तरह थी, पर अब नशा उतर गया है। मैं क्या किसी समय इसके पीछे पूरा देश दीवाना था, पर जैसे जैसे इस पर संदेह के बादल मंडराने लगे वैसे वैसे लोगों का मन खट्टा होता गया।
उसकी बात को भूलने के लिए मैंने टीवी खोला और एक समाचार चैनल इस उम्मीद पर देखने का प्रयास किया कि वहां कोई नई जानकारी मिल जाये। टीवी पर समाचार शुरू हो चुके थे और उद्घोषिका अपने मधुर स्वर में कह रही थी -“आज भारतीय टीम ने बंगलादेश को दुसरे वनडे में हराकर सीरीज जीतकर तारीफ का काम किया है और अब आईये करते है उसकी तारीफ …….”
इससे पहले वह तारीफ का दौर शुरू करतीं हमने अपना टीवी चैनल ही बदल दिया। क्रिकेट का भारतीय जनमानस पर बरसों तक प्रभाव रहा है और गत माह में लोग इससे विरक्त हो चुके हैं । इतना बड़ा विश्व कप चल रहा था और भारतीय क्रिकेट प्रेमी उससे कटे रहे, इतना ही काफी था उसे इस खेल से दूर करने के लिए। यह एक शो बिजिनेस की तरह हो गया था और उसकी यह खासियत है कि एक बार मार्केट में उसका पतन हुआ या साख खराब हुई तो फिर वैसी उसकी वापसी नहीं होती। मेरे एक लेख में जो यूनीकोड में न होने के कारण नहीं पढा जा सका था उसमें साफ लिखा था कि क्रिकेट का एक व्यापार की दृष्टि से अब यहां भविष्य ज्यादा नहीं है , खेल की दृष्टि से यह चलता रहेगा पर अब उसका वह मुकाम नहीं रहने वाला। हालांकि पूंजीपति, प्रचार माध्यम और दुनियां के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी इसके लिए कोइ कसर नहीं उठाएंगे पर धीरे धीरे सब थमने लगेगा। जब विश्व कप शुरू हो रहा था तो मैं अपने ब्लोग बनाने में जुटा था, और सोच रहा था कि प्रथम दौर में मैच नीरस रहने वाले है तो क्यों न अपना काम करके बाद में मैचों का आनंद लिया जाये , जिस दिन भारत का मैच बंगलादेश से था मैंने यह सोचकर टीवी नहीं खोला कि भारत इस मैच को जीत जायेगा पर घर के एक सदस्य ने मुझे सुबह आकर खबर दीं कि भारत को बंगलादेश ने हरा दिया है, मुझे दुःख तो नहीं पर आश्चर्य जरूर हुआ, क्योंकि टीम की फिटनेस को लेकर मेरे मन में पहले से संशय था पर इतना नहीं कि यह बंगलादेश से हार जायेगी। वैसे ही मेरा मोह इससे भंग हो रहा था और इसके बाद तो मैंने आज तक कोई मैच नहीं देखा और इसकी संभावना कम ही है कि आगे कभी इतनी दिलचस्पी से मैच देखूंगा । यह क्रिकेट मेरे दम से नहीं चल रहा था पर मुझ जैसे करोड़ों दीवाने हैं जिनका यही हाल है , मेरे साथ रहने वाले मित्रों, परिचितों और रिश्तेदारों में कम से कम पचास लोग ऐसे हैं जो इससे विरक्त हो गये हैं । टीवी वाले कह रहे थे कि टीम इंडिया ने आज अपनी नाक बचा ली । अब बताईये भला इतने छोटे मैच कोई नाक का सवाल होते हैं। नाक के सवाल तो विश्व कप के मैच होते हैं और वहां जो हुआ सबने देखा है।
जहाँ तक लोगों की भावनाओं का सवाल है तो कहते हैं न कि पहले प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद में अमृत पिलाने से क्या फायदा। वही हाल क्रिकेट प्रेमियों के ज़ज्बातों का है, जो अब समाप्त हो चुके हैं और ऎसी जीतों से अब उनका लौटना कठिन ही है।

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