अपनी करनी का फल भुगत रहा है अमेरिका


अमेरीका के वर्जीनिया टेक युनिवर्सिटी में ३२ लोगों कि ह्त्या से पूरा अमेरिका हिल गया है। जिस तरह पूरे विश्व में अमेरिका के खिलाफ वातावरण बन गया है उसे देखते हुए ऎसी घटनाओं का वहां होना आश्चर्य की बात नहीं है। अमेरिका द्वितीय विश्व युध्द के बाद पूरी दुनियां में एक दादा की भूमिका अदा कर रहा है और इस कारण उसके दुश्मनों की संख्या बद रही है। वह विश्व का सर्वशक्तिमान राष्ट्र है इसमें कोई संदेह नहीं है और उसके नागरिक अपने राष्ट्र से जितना प्रेम करते हैं वह दूसरों के लिए अनुकरणीय है। अमेरिकी समाज विश्व के अन्य समाजों से आर्थिक, सामाजिक और बौध्दिक रुप से ज्यादा संपन्न है और यही कारण है जितना अमेरिकियों को पसंद किया जाता है उतना ही नापसंद भी। जब तक अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों पर हमला नहीं हुआ था तब तक उसे एक सुरक्षा की द्रष्टि से अभेद्य माना जाता था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने अपने दुश्मनों को सबक सिखाने का निर्णय लिया और वह अपने प्रयासों में सफल भी रहे पर उनकी समस्या यह है उन्होने शीत युध्द के समय अपने परम शत्रू सोवियत संघ और उसके मित्र देश -जिसमें भारत भी शामिल है -के विरूध्द वह कई ऐसे संगठनों को खडा करता रहा जिनेहं बाद में कयी देशों ने आतंक वादी करार दिया । अमिरिका ने किसी तरह सोवियत संघ को विघटित कर लिया, जो शायद उसकी सबसे बड़ी गलती भी साबित हुई। राजनीती का नियम है कि अपने विरोधी को उल्झाये रहो पर उसे खत्म मत करो । यदि उसे खत्म करोगे तो दुसरे दुश्मन खडे हो जायेंगे और तुम जब तक उनको पहचानने का प्रयास करोगे तब तक वह तुम्हें हानि पहुंचा देंगे।
अमेरिका ने सोवियत संघ के विरूध्द धर्म भाषा और क्षेत्र के नाम पर बने संगठनों की आंख मूँद कर मदद की और जब काम निकल गया तो उनसे आंखें फेर लीं , तो मुहँ में ख़ून लगा चुके उन संगठनों की जीभ अमेरिकी ख़ून पीने के लिए लप-लापाने लगी। शीत युध्द के समय उसने इस्लामिक अतिवादियों की जमकर मदद ली , और रूस के मुस्लिम बाहुल्य इलाक़े उससे अलग कराकर ही चेन की सांस ली। रूस आज भी चेचन्या में जूझ रहा है पर अब अमिरिका भी उन अतिवादियों का निशाना है। अमिरिकी रणनीतिकारों ने हमेशा एक ही गलती की है कि उन्होने अपने दुश्मन और विरोधियों को तंग करने वाले देशों और संगठनों की आर्थिक और सामरिक मदद की पर इस पर ध्यान नहीं दिया कि वहां उसे समर्थन में प्रचार हो रहा है या दुष्प्रचार । पाकिस्तान सहित अनेक देशों को उसने अपने लोकतात्रिक सिध्दान्तों की अवहेलना करते हुए मदद कराने में कोई परहेज नहीं की। पूरे विश्व में जो धार्मिक कट्टरवाद फैला तो इसके लिए अमैरिका ही जिम्मेदार है। उसने नमक खाकर पीठ में छुरा घुंपने वालों को मदद की । आज वह व्यवहार उसके साथ हो रहा है। उसे यहाँ रहने वाले ही उस पर हमले कर रहे है और वह अपने दुश्मनों अपने देश की सीमा के बाहर ढूँढ रहा है।

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टिप्पणियाँ

  • अभय तिवारी  On अप्रैल 20, 2007 at 6:43 पूर्वाह्न

    बजा फ़रमाया आपने..

  • rajlekh  On अप्रैल 20, 2007 at 1:40 अपराह्न

    abhay tiwari ke comeent ke liye dhanyavaad

  • ePandit  On अप्रैल 20, 2007 at 3:48 अपराह्न

    सच ही है। अमेरिका दुधारी तलवार से खेल रहा है।

  • sanjeev ,Mississauga Canada.  On अप्रैल 20, 2007 at 5:16 अपराह्न

    No ,
    IS NOT RESPONSIBLE FOR EVERY THING GOING ON IN YOUR BACKYARD.

    STOP BLAMING AMERICA FOR EVERYTHING .

    LOOK AROUND 99% THINGS ARE NOT RELATED TO USA , BUT GETS BLAME FOR 100% OF IT.

    BECAUSE YOU DO NOT WANT TO TAKE RESPONSIBILITY.

  • रजनीश मंगला  On अप्रैल 20, 2007 at 10:27 अपराह्न

    अजी इन छुट पुट घटनाओं से अमरीका का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। आपने बातें सही लिखी हैं परन्तु निष्कर्ष ग़लत निकाला है।

  • अनूप भार्गव  On अप्रैल 21, 2007 at 6:45 पूर्वाह्न

    अमेरिका की आलोचना अगर आप करना चाहते हैं तो आप को उस का पूरा अधिकार है (यह देश इन्हीं अधिकारों के सिद्धान्तों पर बना है ) लेकिन उस आलोचना को क्रपया इस त्रासदी से न जोड़िये ।

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