वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने अपने सचिव से कहा-‘तुमने उस दो कौड़ी के निर्देशक को फोन किया कि नहीं?‘
सचिव ने कहा-‘कर दिया साहब! आता होगा!’
वह पुराना अभिनेता चिल्लाया-‘उसकी हिम्मत कैसे हुई यह कहने की कि वह अपनी अगली पीढ़ी में किसी नौजवान को अवसर देगा। क्या उसने हमारी फिल्मों से इतना पैसा कमा लिया है कि वह अपनी अलग से फिल्म बनायेगा। अभी तक तो उसकी कंपनी को अप्रत्यक्ष रूप से हम ही मदद करते हैं। क्या उसने अपनी कंपनी इतनी दमदार कर ली है कि क्या वह हमारे बिना फिल्म बनायेगा। अखबारों में कहता है कि अगली फिल्म में किसी नौजवान पीढ़ी के लड़के को हीरो बनायेगा। वह क्या सोचता है कि हम पचास के हो गये तो क्या बूढ़े हो गये हैं। अरे, वह तो हमने अपनी उम्र नहीं छिपायी वरना यहां तो लोग पांच पांच साल उम्र कम बताते हैं। क्या वह उन्हीं में से किसी को चांस देगा? उसकी हिम्मत कैसे हो गयी यह कहने कि अब फिल्मों में युवा पीढ़ी को आना चाहिये।’
सचिव ने कहा-‘साहब, अभी आप पचास के कहां हैं? आपकी उम्र अभी चालीस साल है। आप अपने रक्तचाप को सामान्य रखने का प्रयास करें। हो सकता है कि यह खबर गाॅसिप हो? आजकल समाचार पत्र पत्रिकायें और टीवी चैनल इतने हो गये हैं कि अपने समाचार बेचने के लिये इस तरह की सनसनी पैदा करते हैं।’
इतने में वह निर्देशक अंदर आया और हाथ जोड़कर पुराने अभिनेता के सामने खड़ा हो गया। अभिनेता ने उसे घूरकर देखा और फिर कहा-‘ओ! तो तुम आ गये। भई, हम तो सोच रहे हैं कि अब तुम्हारी कंपनी से दूर हो जायें ताकि नौजवान पीढ़ी को मौका मिल सके।’
निर्देशक ने कहा-‘आप कैसी बात करते हैं? आप तो मेरे अन्नदाता हैं।’
अभिनेता ने गुस्से में उसके सामने वह पत्रिका फैंक दी जिसमें उसका नौजवान पीढ़ी को अवसर देने का बयान छपा था।
निर्माता ने उसे देखा और फिर हंसने लगा तो अभिनेता का दिमाग घूम गया और बोला-‘मैं तुम्हारे इंतजार में दस सिगरेट फूंक चुका हूं और तुम्हें हंसी आ रही है। लगता है तुम्हारे पर निकल आये हैं। अभी इसी वक्त यह बयान जारी करो कि यह गाॅसिप है वरना अपना खेल मेरे घर से खत्म ही समझो।’
निर्देशक ने कहा-‘साहब, आपने इतना गुस्सा कर अपना खूना जलाने से पहले मुझसे पूछा तो होता। अरे, यह बयान मैंने आपके यह कहने के बाद ही दिया है कि ‘आपके सुपुत्र बाबा को लेकर एक छोटे बजट की फिल्म बनाऊं। अरे, अपने बाबा ही तो वही युवा पीढ़ी है। आपने क्या समझा था मैं कि किसान या मजदूर के बेटे को फिल्म का हीरो बनाने वाला हूं। हां, पर मेरी उस छोटे बजट की फिल्म में बाबा को एक मजदूर के बेटे की ही भूमिका निभानी है। क्या मुझे आप नासमझ समझते हैं। आजकल कहीं भी ‘युवा पीढ़ी को आगे लाने’ का मतलब किसी भी बड़े क्षेत्र में सक्रिय परिवार के युवा सदस्य को आगे लाना ही है। अपना बाबा नौजवान है………………………’’
अभिनेता ने संकोच के साथ कहा-‘पर वह पच्चीस का है।’
निर्देशक ने एकदम उतावली के साथ कहा-‘आप किसी दूसरे को यह मत बताईये कि वह पच्चीस के हैं। हम तो उन्हें अट्ठारह साल का कहकर प्रचारित करेंगे। फिल्म में एक गाना भी होगा जिसमें हीरो की उम्र अट्ठारह और हीरोईन की उम्र सोलह लिखी जायेगी।’
अभिनेता ने खुश होकर कहा-‘यार, यह बात तो मैं भूल ही गया था। शायद इसलिये कि मुझे उसकी उम्र तीस ही याद थी और ‘नौजवान और युवा पीढ़ी’ से मैंने समझा कि तुम किसी दूसरे लड़के की बात कर रहे हो।’
निर्देशक ने कहा-‘हुजूर! आप इतने बड़े आदमी होकर भी कभी छोटी बात कर जाते हैं तब मेरा मन दुःखी हो जाता है। यह तो छोटे परिवारों में होता है कि चालीस और पचास के पास पहुंचे आदमी को बूढ़ा कहा जाता है जबकि बड़े परिवार में तो साठ साल तक आदमी को जवान माना जाता है। यकीन न हो तो आप बाजार में चलते फिरते किसी आदमी से पूछ लो वह तो आपको जवान बाबा को नौजवान कहेगा।’
अभिनेता ने चैन की सांस ली और कहा-‘ठीक है! अब तुम बाबा पर फिल्म बनाने की तैयारी करो। मैं तो डर ही गया था। नौजवान पीढ़ी की बात पढ़कर मेरे दिमाग में घबड़ाहट फैल गयी थी।’
निर्देशक बाहर चला तो उसके पीछे अभिनेता का सचिव भी आया। उसने निर्देशक से कहा-‘एक समस्या खड़ी हो गयी है। अभिनेता जी अपनी शादी की तीसवीं सालगिरह मनाना चाहते हैं। उम्र अपनी पचास बताते हैं। उनकी शादी के वीडियो देखो तो उसमें वह तीस के वैसे ही दिख रहे हैं। अब क्या करें? मैंने तो मना किया कि इससे बाबा और उनकी दोनों की उम्र सभी को पता चल जायेगी। बाबा भी उन्तीस वर्ष के हैं।’
निर्देशक ने कहा-‘इतनी सी बात! शादी की सालगिरह को बीसवी बता दो।’
सचिव ने कहा-‘पर अभिनेताजी की शादी तो फिल्म में आने के बाद ही हुई थी। उनके चाहने वालों को सब याद है। अभिनेता की शादी और बाबा की जन्म तारीख का सभी को पता है। हां, उनकी स्वयं की उम्र के बारे में दस वर्ष कम का प्रचार पहले से ही होता रहा है। इसलिये उसकी समस्या नहीं है।’
निर्देशक ने कहा-‘कोई बात नहीं! लोगों की याद्दाश्त कमजोर होती है। फिर पर्दे की चमक के सामने तो उसकी सोच वैसे ही गायब हो जाती है। यह पब्लिक सब जानती है पर उसे बताने वाले भी तो हम ही हैं न! जैसा हम बतायेंगें वैसा ही अखबार और टीवी चैनल बतायेंगे और वही तो वह जानेगी।’
सचिव खुश हो गया और बोला-‘ व्हाट इज आईडिया सर! नौजवान पीढ़ी जिंदाबाद।’
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कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप
2 Comments
प्रिय मित्र
आपकी रचनाएं पढकर सुखद अनूभूति हुई। नयी तथा ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए मेरे ब्लाग पर अवश्य पधारे।
अखिलेश शुक्ल
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नेताओं-अभिनेताओं में उम्र का फेर आम बात है। कोई विधायक हैं जिन्होंने अपनी उम्र अपनी माँ से सिर्फ ६ साल कम बतायी है। दूसरी ओर एक और विधायक हैं जिनके जन्म प्रमाणपत्र के अनुसार वे २३ वर्ष में ही विधायक बन गये थे, जबकि इसके लिये न्यूनतम आयु २५ वर्ष निर्धारित की गयी है।