हमने क्या बुरा किया-कविता
जिनको अपना समझकर सच कहा
वह बेगाना समझने लगे
जब तक उनकी लापरवाह अदाओं पर
खामोश रहे
उनको हम अच्छे लगे
जो एक बार किया इशारा
उनको संभल जाने का
तब से मूंह फेरकर वह जाने लगे
अजनबियों जैसे हो गये अब
गैरों की तरह मिलने लगे
सोचते हैं हमने सच कहकर क्या गलत किया
गलत राह पर चलने के खतरे
होते है बहुत
अगर हमने उनको आगाह किया तो
क्या बुरा किया
वह चले जा रहे हैं फिर भी
बस अब हम से संभलकर चलने लगे
…………………………
दीपक भारतदीप
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दीपक भारतदीप, posted on
June 8, 2008 at 3:36 PM, filed under
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