लोगों की लिखने-पढ़ने की रुचि में बदलाव भी संभव-आलेख

कल मैंने हिंदी अंग्रेजी अनुवाद टूल पर एक पोस्ट डाली थी तो उस पर शमशाद जी ने अपनी टिप्पणी (देखें बाक्स में) रखी और यह मानी इस टूल पर हिंदी का ब्लाग रखकर पढ़ा जाये तो नब्बे प्रतिशत परिणाम सही आता है। मैंने भी इतना ही अनुमान किया था। उन्होंने कहा हालांकि कुछ और बातें भी लिखीं है पर मुझे लगता है कि वह उनको इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि हिंदी अंगेजी दोनों कापी हो जाता है। हां, यह सही है पर उसके बाद अगर कर्सर पुनः अंग्रेजी वाले भाग पर क्लिक किया जाये तो वही हिस्सा कापी होता है।

उनकी टिप्पणी से इस बात की पुष्टि तो हो ही जाती है कि अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद में जितनी निराशाजनक स्थिति है उतनी  हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद नहीं हैं।  गूगल का एक लक्ष्य हिंदी ब्लाग लेखन को प्रोत्साहन देने का इससे तो पूरा हो ही रहा है। मैं एक बात कह सकता हूं कि अगर हम इस पर अपने अनुवाद के लिये कुछ अभ्यास करें तो शेष 10 प्रतिशत से विश्व में हिंदी ब्लाग लेखक अपना एक उल्लेखनीय  स्थान बना सकते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दूं कि यह अगर हिंदी से अंग्रेजी से अनुवाद कर रहा है तो इसका मतलब यह है कि कुछ अन्य भाषायें भी ऐसी होंगी जिनका यह अंग्रेजी में अनुवाद अच्छा करता होगा। इस बात का हमें विचार अवश्य करना चाहिए। अभी नहीं तो आगे अन्य भाषाओं के ब्लाग लेखक अवश्य ही इसका लाभ उठाते हुए अवश्य प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे चाहे भले ही उनको अंग्रेजी कम आती हो। अभी तक हम यह शिकायत करते हैं कि हिंदी में कम लिखा गया है पर आगे यह समस्या भी आयेगी कि हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुसार नहीं लिखा जा रहा हैं। इसलिये हमें यह विचार करते हुए ही लिखने के मार्ग पर आगे बढ़ना है। 

दीपक जी
अंग्रेजी से हिन्दी में ट्रांसलेशन तो गूगल टूल पर बिलकुल बेकार है हां हिन्दी से अंग्रेजी ट्रांसलेशन काफी हद तक ठीक है। परंतु यहां भी एक समस्या है हिन्दी टाइप करने के बाद ट्रांसलेशन के लिये हम बॉक्स में डालते हैं तो अनुवाद बहुत बेकार होता है परंतु किसी हिन्दी ब्लॉग का यूआरएल लिखकर ट्रांसलेशन करते हैं तो 90 प्रतिशत सही हो रहा है। मैंने हिन्दी में एक पोस्ट लिखकर अंग्रेजी में अनुवाद किया ठीक हुआ परंतु सिर्फ पढने के लिये ठीक था उसे कॉपी करके दूसरी जगह पेस्ट करने पर परिणाम बहुत बुरा निकला। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों साथ ही कॉपी हो रहे थे।

अभी तक हिंदी ब्लाग लेखक केवल हिंदी के पाठकों के वृद्धि की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब उन्हें यह भी सोचना होगा कि ऐसे टूलों से उनके ब्लाग किसी भी भाषा के लोग पढ़ सकते है। यह केवल हिंदी ही नहीं हर भाषा के ब्लाग को नये आयाम देने के साथ विश्व में लोगों के पढ़ने और लिखने की रूचियों परिवर्तन में करेगा। मैने आज भी अखबारों में समाचार के आधार पर इस टूल के निराशाजनक होने की बात सुनीं। मैंने एक सज्जन को बताया कि-‘‘इससे हिंदी से अंग्रेजी में अच्छा अनुवाद हो जाता है?’

उन्होंने अपनी नाक-भौं सिकोड़ी-‘इससे क्या फायदा?’

लोगों के कई भ्रम हैं जो इतनी आसानी से नहीं टूटेंगे। दरअसल पिछले कई वर्षों से हिंदी में लोगों को प्रभावित करने वाली सामग्रियां कम होती जा रही है। हां, इस देश में कई लेखक हुए हैं और उनको तमाम पुरस्कार मिले ं पर जनता में उनकी छबि वैसी नहीं बन पायी जैसी अपेक्षा की जाती है। इसका कारण यह भी रहा कि अधिकतर लेखकों ने पहले स्वांत सुखाय लिखा फिर वह पुरस्कारों की दृष्टि से लिखने लगे। देश की गरीबी और भुखमरी को उजागर कर उसके लिये दर्द बटोरने के लिये लिखने वाले अनेक लेखकों ने लिखा और पुरस्कार और सम्मान पाये भी पर जहां लोग इस तरह का दर्द भोग रहे हैं उनको न तो इसका लाभ मिला और न ही कभी उनको अपने दर्द से अलग कुछ मजेदार पढ़ने के लिये मिला। हिंदी में पाठक नहीं मिल रहे हैं तो इसका कारण यह है कि लोगों को यह यकीन नहीं है कि हिंदी में कोई ऐसा लिखा हुआ मिल पायेगा जिससे मन को थोड़ा मनोरंजन और शांति मिल जाये। हालांकि यह अकेला कारण इसके लिये जिम्मेदार नहीं है क्योंकि अधिकतर लोग हिंदी के विकास के बहाने अपने हित साधने के लिये आगे आते हैं और वही तय करते हैं कि किस लेखक को आगे बढ़ायें और किस की उपेक्षा कर दें। शक्ति के सारे केंद्र पर वही लोग हैं और कुप्रबंध का शिकार रहे हिंदी के अनेक लेखक गुमनामी के अंधेरे में खो गये।

ऐसे में जो लेखक अंतर्जाल पर लिखने के लिये आये हैं उन्हें यह बात समझ लेनी होगी कि उनको अपनी भूमिका अंतर्राट्रीय स्तर पर निभानी होगी।  यह मजाक नहीं है और न ही कोई कल्पना। आखिर इस टूल के हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद न होने की कोई शिकायत नहीं मिली। शमशाद जी की टिप्पणी से भी इस बात की पुष्टि होती है। वैसे भी हमारी दिलचस्पी इसके हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद में रहनी चाहिए न कि उसके अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद के बारे में सोचकर चिंतित होना चाहिए।

 
http://aakrosh-aakrosh.blogspot.com/

Leave a Reply