अंधेरे मे तीर चलाना ही उनका काम है-चार क्षणिकाएं

हादसों की खबर से अब
शहर सिहरता नहीं
अपने दर्द इतने भर लिये इंसानं ने
कि किसी अन्य की लाश  से हमदर्दी
जताने के लिये निकलता नहीं
कुछ लोग गिरा देते हैं लाशें
शायद कोई उनको देखकर चैंक जाये
जानते नहीं कि
कोई दूसरे को देखेगा तो तब
अब अपने से आगे देखने की
रौशनी और चाहत होगी
किसी की आंखों  में
अपने सामने कत्ल होते देखकर भी
आदमी अब सिहरता  नहीं
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शांति की बात सियारों से नहीं होती
पीठ पीछे वार करने वालों से
कभी वफादारी की उम्मीद नहीं होती
जो यकीन करते हैं उन पर
मुसीबत में किसी की भी
उनसे हमदर्दी नहीं होती
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जख्म बांटना ही उनका काम है
इसलिये ही तो उनका नाम है
खंजर लेकर घूमने वालों से दोस्ती की
ख्वाहिश करते हैं कायर
क्योंकि घुटने टेकना ही रोज उनका काम है
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आग लगाना उनका काम है
मिलते उनको दाम है
कौन देता है कीमत
कौन खरीदता है लाशें
रौशनी जितनी तेज है इस शहर में
अंधेरे का राज है उतना ही गहरा
सच तो सब जानते हैं
पर अंधेरे मे तीर चलाना ही उनका काम है
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