जब लोग अपने दिल की बात लिख देते हैं-आलेख

कल  मीनाक्षी ने मुझे हतप्रभ कर दिया क्योंकि अपने ब्लाग (शब्द पत्रिका) पर मैंने जो लेख रखा था उस पर मुझे कोई टिप्पणी अपेक्षित नहीं थी, पर महेंद्र मिश्र जी और मीनाक्षी जी ने त्वरित टिप्पणी देकर मुझे यह सोचने को बाध्य किया कि आखिर मैं इस हिंदी ब्लाग जगत को क्या समझूं?

पिछले दिनों श्री समीरलाल जी की बात को ध्यान में रखते हुए मैंने आज एक योजना बनाई। सोचा कि चलो आज  से दूसरों के ब्लाग सामने रखकर कविता लिखेंगे और टिप्पणी के रूप में भी रखेंगे और अपनी पोस्ट भी तैयार हो जायेगी। दूसरा लक्ष्य था कि जरा आज हिंदी के ब्लाग एक जगह दिखाने वाले एग्रीगेटर ब्लागवाणी को जरा ध्यान से भी देखें क्योंकि मैं किसी एक एग्रीगेटर  पर ब्लाग देखने को कभी वरीयता नहीं देता। सभी जगह अपने विचार के अनुसार जाता ही रहता हूं। सबसे पहला ब्लाग श्री अनिल रघुराज जी का सामने आया। मैने उसे ध्यान से पढ़ा। मुझे लगा कि इस पर मेरे लिये भी कुछ लिखने को है। इसीलिये एक कविता लिखी और वहां कमेंट के रूप में रख दी। वहां से लौटकर मैंने सोचा लोग चालाकी समझ जायेंगे इसलिये एक कविता और जोड़कर अपनी पोस्ट बनायी।

इसी बीच थोड़ा काम से चला गया और फिर आकर ब्लागवाणी खोली। मैंने सोचा कि चलो कोई और विषय देख लें। वहां देखा तो मदर डे पर अधिक पोस्टें थीं और सोचा कि बना लें कोई हास्य कविता और सब जगह पेस्ट कर दें पर फिर लगा कि उसमें कुछ ऐसा वैसा भी  आ सकता है कि जो किसी कि भावना आहत हो। हालांकि मैं उसमें ऐसा कुछ नहीं लिखता पर हास्य कविता ही अपने आप में ऐसी चीज है कि किसी को भी लग सकता है कि देखो हम तो कितना गंभीर हैं और यह हंस रहा है। अनेक पोस्टें देखीं और लगा कि चलो यह नुस्खा आगे भी आजमायेंगे।  कुल मिलाकर निराश होकर वहां से लौटे। उसी समय एक दोस्त का फोन आया कि आज कुछ ब्लाग पर लिख रहे हो? तो हम देखें। यार, तुम्हारे साथ एक मुसीबत यह है कि इतने ब्लाग मना रखें पता हीं नहीं पड़ता कि किस पर नयी पोस्ट है? मैं तो वह बीस हजार वाली शब्द पत्रिका ही खोलता हूं।’

हमें कुछ नहीं सूझा हमने कह दिया-‘‘आज कहीं घूमे आओ। हम चिंतन लिख रहे हैं और यह शब्द पत्रिका पर ही आयेगा। वैसे तुम कोई भी ब्लाग खोलकर पीछे भी पढ़ा करो। वैसे भी तुम भुगतान के रूप में छहःपोस्ट पढ़ते हो एक टिप्पणी लगाते हो। हमारे मित्रों के ब्लाग पढ़कर हमें उनके बारे में पूछते हो। हमारे कहने के बावजूद वहां टिप्पणियां नहीं लगाते। अगर चाहते हो कि अंतर्जाल पर अच्छा पढ़ा जाय तो उस पर कमेंट लगाओ। अब क्या हम लेखक ही इसका भी दायित्व उठायें? हमें भी क्या मिलता है।’

मित्र का फोन रखते ही हमारे मुख से निकला चिंतन शब्द हमारे दिमाग में घुस गया और फिर बिना किसी संदर्भ के लिखने का मन बनाया। आंखें बंद कीं(कृतिदेव पर लिखते समय ऐसा ही करता हूं) और लिखने बैठ गया। मन में विचारों का क्रम तो सुबह से चल रहा था और एक बार आया कि इसे रोककर दूसरी पोस्ट लिखें पर फिर मैंने सोचा कि अब बहुत हो गया अस्वाभाविक रूप से लिखते हुए। मैनें अपनी पोस्ट लिखी। पोस्ट रखते समय मैं यह अनुमान कर रहा था कि ब्लागवाणी पर अधिकतम पांच का आंकड़ा शायद ही छू पाये। सामान्य शीर्षक और फिर साथ में आलेख का संकेत ब्लागवाणी पर हिट दिलाएगा यह आशा मैं नहीं कर रहा था। न ही अपने मित्र ब्लाग लेखकों से यह आशा कर रहा था कि वह टिप्पणी लिखने के लिए इसे पढ़ेंगे क्योंकि इसके लिये कोई और पोस्ट भी आ सकती है। रखते समय यह भी जानता था कि यह पोस्ट आगे चलकर लंबे समय तक हिट लेती रहेगी और इस पर टिप्पणियां आतीं रहेंगी।

मैं अब ऐसी पोस्टें नहीं लिखना चाहता जो सामयिक विषयों से संबंधित हों। उसमें मेरा परिश्रम हो समय व्यर्थ ही नष्ट होता है।

मीनाक्षी जी ने लिखा
“पढ़ते तो हमेशा है और सोचते हैं कि आप के लेख टिप्पणी के
मोहताज़ नहीं . आज अनायास जी चाहा कि अपने मन के भाव
लिख डालें. आपके सभी  ब्लॉग एक से बढ़कर एक हैं. जीवन को
आसान बनाने के छोटे छोटे मंत्र यहाँ हैं जो बड़ी गहरी बात समझा
जाते हैं. आभार”

महेंद्र मिश्रा जी ने लिखा
“अपने अंदर ही यह अहसास होता हैं कि हम केवल अपने मुख से अपनी झूठी प्रशंसा  कर रहे हैं।
बहुत बढ़िया आलेख प्रस्तुति के लिए धन्यवाद”

टिप्पणियां बहुत आतीं हैं पर कुछ लोग अपने मन की बात इस तरह रख देते हैं तब मैं सोचता हूं कि इनके लिए लिखते रहना चाहिए। कुछ दिनों से मेरा विचार तो यह भी बनता और बिगड़ता  रहा है कि नारद और चिट्ठा जगत ने मेरे जो दो ब्लाग मुझसे पूछे बगैर ही अपने यहां दिखाने शुरू किये हैं अब उन पर ही लिखूं-क्योंकि ब्लागवाणी पर जब कोई हिट की चर्चा मेरे ब्लाग पर करता है तो मुझे अपना ध्यान भंग होता नजर आता है। आज मीनाक्षी जी की टिप्पणी ने मेरे इस विचार को समाप्त ही कर दिया है। मेरा लक्ष्य आम पाठक है और अपनी बात वहां तक पहुंचाने से ही मुझे संतुष्टि होती है। टिप्पणियां लिखता हूं और लोग मुझे देते हैं। इसे मैं एक सामाजिक व्यवहार की तरह मानता हूं-जैसे एक दूसरे से नमस्कार या प्रणाम करना। मेरी अनेक पोस्टें बिना टिप्पणी के आतीं हैं।  आम पाठक की तरह ब्लाग लेखकों में भी विविध रुचि वाले लोग हैं पर चिंतन भी कोई पसंद करता हूं यह मुझे आज पता लगा।
कुछ ऐसी भी घटनाऐं हुईं है कि मैं किसी वरिष्ठ ब्लाग लेखक की पोस्ट पर टिप्पणियां रखकर आया क्योंकि उनका लेखकर मुझे पसंद आया। उन्होने मेरी पंद्रह-पंद्रह दिन पुरानी पोस्ट पर टिप्पणी लिख कर जो कहा उसे यहां दोहराने से कोई मतलब नहीं है। एक ब्लाग लेखक ने लिखा कि‘आपकी हास्य कविता देखकर तो मैं यह समझा कि आप को आम हास्य कवि हैं पर आपका इस ब्लाग की यह  इतनी गहन चिंतन वाली पोस्ट देखकर तो मै हैरान रह गया हूं।’

मैं बहुत पोस्टें लिखता हूं और मुझे नियमित टिप्पणियां देने वाले मित्र सभी पर आयें यह संभव नहीं है और आयें तो मुझे यह लगेगा कि यह मेरी वजह से कष्ट उठा रहे है।

अगर मेरा अनुमान सही है तो अनेक आम पाठक भी टिप्पणियां लिख रहे हैं। कुछ लोगों के पास हिंदी टूल मैंने भिजवाया है। इस समय ब्लाग लेखकों में तमाम तरह की निराशाजनक बातों की चर्चा चल रही है। ऐसे में आम पाठक अगर यह सोचता है कि उसे और अच्छा लिख हुआ पढ़ने को मिले तो उसे भी अब टिप्पणियों को बोझ उठाना होगा। आम पाठकों से सहयोग के बिना अंतर्जाल पर हिंदी में बहुत अच्छा और सार्थक लिखना कठिन है। मेरे ब्लाग पर आने वाले पाठक साइडबार से दूसरे के ब्लाग पर जाते हैं तो मेरी उनसे अपेक्षा रहती है कि वहां वह कोई टिप्पणी जरूय लिखें। सभी ब्लाग पर कमेंट के कालम हैं।

अब हिंदी ब्लाग जगत पर अनेक लेखक साहित्य-व्यंग्य, कहानी, कविता और आलेख-लिख रहे हैं और अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद टूल को जिस तरह गूगल हिंदी पृष्ठों के साथ जोड़ रहा है उससे लग रहा है कि हिंदी के कई नये लेखक  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना और भाषा का नाम रोशन करेंगे।

4 Comments

  1. Posted May 12, 2008 at 4:03 PM | Permalink

    हिंदी के कई नये लेखक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना और भाषा का नाम रोशन करेंगे।- आमीन

  2. Posted May 12, 2008 at 6:39 PM | Permalink

    दीपक जी मीनाक्षी जी के विषय मे एक बात बताना चाहूंगा। वे बहुत अच्छा हाइकू रचती है। और उन्होने हाइकू को नया हिन्दी नाम दिया है त्रिपदम। कभी आप इस विषय मे भी लिखियेगा। आप और मीनाक्षी जी जैसे लोग हिन्दी ब्लाग जगत की शान है।

  3. Posted May 12, 2008 at 10:46 PM | Permalink

    बहुत गहन चिन्तन में लगे हैं आप, इसलिये डिस्टर्ब नहीं करेंगे अभी. चलते हैं शुभकामना देते हुए. :)

  4. khushi
    Posted September 25, 2008 at 5:50 AM | Permalink

    hello Deepak ji ,
    me ye chahti hu k aap k vichar mujhe bahut achhe lage hai. aap ka man ek ek nirmal or pawan hai. jis trah se aap ne apne vichar prkat kiye hai mujhe achcha laga. me is duniya ki sabse ………….. aage aap likhe.


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