क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना-हास्य व्यंग्य

ब्लागर अपने कंप्यूटर पर बैठा था कि उसकी पत्नी ने उसे दूसरे ब्लागर के मिलने की खबर अंदर आकर सुनायी। उसने कहा-‘बोल दो घर पर नहीं है।’

तब तक दूसरा ब्लागर अंदर आ गया और बोला-‘भाई साहब हमसे क्या नाराजगी है?’

पहले ब्लागर ने कहा-‘‘नाराजगी तुमसे नहीं है। तुम्हारी भाभीजी से है तुम्हें अंदर न बुलाकर हमें यह बताने आयीं हैं कि तुम आ गये हो। वैसे हमारी नजरें बहुत तेज हैं और हमने देख लिया था कि तुम अंदर आये हो।’

वह आकर उसके पास रखी कुर्सी पर बैठ गया और बोला-‘‘भाभीजी, आप मुझे शिकंजी पिलाईये। भाई साहब जरूर शिकंजी पीते हैं-ऐसा मेरा विश्वास है।’

पहले ब्लागर ने कहा-‘पर यह बात हमने अपने किसी ब्लाग पर तो नहीं लिखी।’

दूसरा ब्लागर बोला-‘मैने अंदाजा कर लिया था। शिकंजी पीकर इंटरनेट पर ब्लाग पर अच्छी तरह लिखा जा सकता है।’

भद्र महिला चली गयी तो वह अपने असली रूप में आ गया और बोला-‘पर जरूरी नहीं है कि शिकंजी पीकर हर कोई ब्लाग पर अच्छा लिख सकता हो।’

पहले ब्लागर ने कहा-‘हां इसमें कोई शक नहीं है, अगर वह कुछ लिखता हो तो?’
दूसरे ने ब्लागर ने कहा-‘हम पर फब्तियां कस रहे हो!
पहले ब्लागर ने कहा-‘‘और तुम क्या कर रहे थे?वैसे इधर कैसे भटक गये।’
दूसरे ब्लागर ने कहा-‘‘मैं एक क्रिकेट प्रतियोगिता करा रहा हूं। जिसमें चार ब्लागर और चार कमेंटरों की टीमें हैं। मै चाहता हूं कि तुम उनके लिये कोई एक्शन सीन लिख दो।’

तब तक गृहिणी शिकंजी के ग्लास बनाकर लायी। उसने जब सुना कि कोई क्रिकेट के एक्शन सीन की बात हो रही है तो वह उत्सुकतावश वहीं एक तरफ बैठ गयी।
पहला ब्लागर-‘क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन? और इतने सारे ब्लागर और कमेंटर तुम्हारे पास आये कहां से? क्या कहीं से नीलामी में ले आये क्या?’

दूसरा ब्लागर अब गृहिण की उपस्थिति के आभास होने पर सम्मान के साथ बोला-‘अरे भाईसाहब, आप भी कैसी बात करते हो। अरे, आजकल वह समय गया। आप देख नहीं रहे कहां का खिलाड़ी कहां खेल रहा है। शहर का वासी हो या न हो तो पर उस शहर की तरफ से खेल तो सकता है। वैसे ही ब्लागर हो या न हो, कमेंटर हो या न हो और उसने कभी इंटरनेट खोला भी न हो पर हमने कह दिया कि ब्लागर तो ब्लागर। हमें अपने काम और कमाई से मतलब है।’
दूसरा ब्लागर उसे हैरानी से देखने लगा। फिर वह बोला-‘‘आप तो कुछ एक्शन सीन लिख दो। आजकल तो क्रिकेट के साथ एक्शन भी जरूरी है। किसी खिलाड़ी को किससे लड़वाना है। लड़ाई के लिये वह कौनसा शब्द बोले यह लिखना है। थप्पड़ या घूसा किस तरह मारे और दूसरे के जोर से लगता दिखे पर लगे नहीं इसलिये मैं ही एक्शन डायरेक्टर तो मैं ही रहूंगा पर यह तो कोई पटकथा लेखक ही तय कर सकता है। फिर उसके लिये कमेटी होगी तो उसमें बहस के डायलाग लिखवाना है। सजा का क्या हिसाब-किताब हो यह भी लिखना है। एक-दो खिलाड़ी ऐसे है जिनको एक दो मैच बाद बाहर बैठने के लिये राजी कर लिया है। उसके लिये तमाम तरह का प्रचार कराना है।

गृहिणी ने पूछा-‘पर यह किसलिये?’

वह बोला-‘अपने शहर की इज्जत बढ़ाने के लिये। देखिये हमारे शहर की कोई टीम नहीं बुला रहा। इसलिये मैं अपने शहर में क्रिकेट के खेल के विकास के लिये यह कर रहा हूं। स्थानीय मीडिया मेंे भी इसके लिये संपर्क साध रहा हूं ताकि अधिक से अधिक लोग वहां पहुंचे। और हां, इटरवैल में नाच गाने का भी इंतजाम किया है।’

पहले ब्लागर ने कहा-‘‘मैने आज तक कोई नाटक नहीं लिखा।’
दूसरा ब्लागर बोला-‘इसमे लिखने लायक है क्या? यह तो सब आसानी से हो जायेगा। बस थोड़ा सोचना भर है। मुझे अन्य व्यवस्थायें देखनीं नहंी होतीं तो मैं ही इस पर लिखता।’’

पहले ब्लागर ने कहा-‘‘मेरे बूते का नहीं है। जब झगड़ा कराना है तो उसके लिये कुछ ऐसा वैसा लिखना जरूरी है, और इस मामले में तुम जितने दक्ष हो मैं तो हो ही नहीं सकता।’

गृहिणी ने दूसरे ब्लागर की तरफ देखकर कहा-‘आपने तो सारे सीन पहले ही सोच लिये है। एकदम जोरदार कहानी लग रही है। बस आपको तो शब्द ही तो भरने हैं। अभी आप यह सीन बताकर जा रहे हैं यह तो उसे भी याद नहीं रख पायेंगे।फिर लिखेंगे कहां से? आप कोशिश करो तो अच्छा लिख लोगे।’
दोनो ने शिकंजी का ग्लास खत्म किया तो वह दोनों ग्लास उठाकर चली गयी । दूसरा ब्लागर बोला-‘‘ठीक है जब क्रिकेट मैच कराना है और उसमें एक्शन के सीन रखने हैं तो यह भी कर लेता हूं। देखो भाभीजी ने हमारा हौंसला बढ़ाया। एक तुम हो जब तब ऐसी वैसी बातें करते हो। भाभीजी बहुत भले ढंग से पेश आतीं हैं और तुम……………………छोड़ो अब तुमसे क्या कहूं

पहले ब्लागर ने कहा-‘हां, पर याद रखना मैंने तुम्हारी उस तुम्हारी पहले और आखिरी कमेंट के बारे में उसे कुछ नहीं बताया। क्या इसके लिये मुझे धन्यवाद नहीं दोगे?
दूसरे ने कहा-‘‘अच्छा मैं चल रहा हूं। और हां, इस ब्लागर मीट पर भी कुछ अच्छा लिख देना ताकि मेरी प्रतियोगिता को प्रचार मिले। फिर देखो तुम्हें कैसे फ्लाप से हिट बनाता हूं।’

वह चला गया और गृहिण ने पूछा-‘‘क्या कहा उसने?’

पहले ब्लागर ने कहा-‘तुमने भी तो सुना! यही कहा‘क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना’।’’

फिर वह मन में सोचने लगा-‘मैने इस बार भी नहीं पूछा कि इंटरनेट पर बने ब्लाग पर मैं यह रिपोर्ट हास्य कविता के रूप में लिखूं या नहीं। चलो अगली बार पूछ लूंगा।
नोट-यह काल्पनिक हास्य-व्यंग्य रचना है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। अगर किसी की कारिस्तानी से मेल हो जाये तो वही इसके लिये जिम्मेदार होगा। इन पंक्तियों का लेखक किसी ऐसे दूसरे ब्लागर से नही मिला।

3 Comments

  1. Posted May 1, 2008 at 1:39 AM | Permalink

    दीपक बाबू बढ़िया है। आपके घर आने पर शिकंजी मिलेगी ना। भगवान करे आपके शहर में क्रिकेट में सब सनक जाएं।

  2. Posted June 28, 2008 at 10:30 AM | Permalink

    hhjhhili

  3. Posted December 3, 2008 at 10:17 AM | Permalink

    क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना-हास्य व्यंग्य
    ब्लागर अपने कंप्यूटर पर बैठा था कि उसकी पत्नी ने उसे दूसरे ब्लागर के मिलने की खबर अंदर आकर सुनायी। उसने कहा-‘बोल दो घर पर नहीं है।’

    तब तक दूसरा ब्लागर अंदर आ गया और बोला-‘भाई साहब हमसे क्या नाराजगी है?’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘‘नाराजगी तुमसे नहीं है। तुम्हारी भाभीजी से है तुम्हें अंदर न बुलाकर हमें यह बताने आयीं हैं कि तुम आ गये हो। वैसे हमारी नजरें बहुत तेज हैं और हमने देख लिया था कि तुम अंदर आये हो।’

    वह आकर उसके पास रखी कुर्सी पर बैठ गया और बोला-‘‘भाभीजी, आप मुझे शिकंजी पिलाईये। भाई साहब जरूर शिकंजी पीते हैं-ऐसा मेरा विश्वास है।’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘पर यह बात हमने अपने किसी ब्लाग पर तो नहीं लिखी।’

    दूसरा ब्लागर बोला-‘मैने अंदाजा कर लिया था। शिकंजी पीकर इंटरनेट पर ब्लाग पर अच्छी तरह लिखा जा सकता है।’

    भद्र महिला चली गयी तो वह अपने असली रूप में आ गया और बोला-‘पर जरूरी नहीं है कि शिकंजी पीकर हर कोई ब्लाग पर अच्छा लिख सकता हो।’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘हां इसमें कोई शक नहीं है, अगर वह कुछ लिखता हो तो?’
    दूसरे ने ब्लागर ने कहा-‘हम पर फब्तियां कस रहे हो!
    पहले ब्लागर ने कहा-‘‘और तुम क्या कर रहे थे?वैसे इधर कैसे भटक गये।’
    दूसरे ब्लागर ने कहा-‘‘मैं एक क्रिकेट प्रतियोगिता करा रहा हूं। जिसमें चार ब्लागर और चार कमेंटरों की टीमें हैं। मै चाहता हूं कि तुम उनके लिये कोई एक्शन सीन लिख दो।’

    तब तक गृहिणी शिकंजी के ग्लास बनाकर लायी। उसने जब सुना कि कोई क्रिकेट के एक्शन सीन की बात हो रही है तो वह उत्सुकतावश वहीं एक तरफ बैठ गयी।
    पहला ब्लागर-‘क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन? और इतने सारे ब्लागर और कमेंटर तुम्हारे पास आये कहां से? क्या कहीं से नीलामी में ले आये क्या?’

    दूसरा ब्लागर अब गृहिण की उपस्थिति के आभास होने पर सम्मान के साथ बोला-‘अरे भाईसाहब, आप भी कैसी बात करते हो। अरे, आजकल वह समय गया। आप देख नहीं रहे कहां का खिलाड़ी कहां खेल रहा है। शहर का वासी हो या न हो तो पर उस शहर की तरफ से खेल तो सकता है। वैसे ही ब्लागर हो या न हो, कमेंटर हो या न हो और उसने कभी इंटरनेट खोला भी न हो पर हमने कह दिया कि ब्लागर तो ब्लागर। हमें अपने काम और कमाई से मतलब है।’
    दूसरा ब्लागर उसे हैरानी से देखने लगा। फिर वह बोला-‘‘आप तो कुछ एक्शन सीन लिख दो। आजकल तो क्रिकेट के साथ एक्शन भी जरूरी है। किसी खिलाड़ी को किससे लड़वाना है। लड़ाई के लिये वह कौनसा शब्द बोले यह लिखना है। थप्पड़ या घूसा किस तरह मारे और दूसरे के जोर से लगता दिखे पर लगे नहीं इसलिये मैं ही एक्शन डायरेक्टर तो मैं ही रहूंगा पर यह तो कोई पटकथा लेखक ही तय कर सकता है। फिर उसके लिये कमेटी होगी तो उसमें बहस के डायलाग लिखवाना है। सजा का क्या हिसाब-किताब हो यह भी लिखना है। एक-दो खिलाड़ी ऐसे है जिनको एक दो मैच बाद बाहर बैठने के लिये राजी कर लिया है। उसके लिये तमाम तरह का प्रचार कराना है।

    गृहिणी ने पूछा-‘पर यह किसलिये?’

    वह बोला-‘अपने शहर की इज्जत बढ़ाने के लिये। देखिये हमारे शहर की कोई टीम नहीं बुला रहा। इसलिये मैं अपने शहर में क्रिकेट के खेल के विकास के लिये यह कर रहा हूं। स्थानीय मीडिया मेंे भी इसके लिये संपर्क साध रहा हूं ताकि अधिक से अधिक लोग वहां पहुंचे। और हां, इटरवैल में नाच गाने का भी इंतजाम किया है।’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘‘मैने आज तक कोई नाटक नहीं लिखा।’
    दूसरा ब्लागर बोला-‘इसमे लिखने लायक है क्या? यह तो सब आसानी से हो जायेगा। बस थोड़ा सोचना भर है। मुझे अन्य व्यवस्थायें देखनीं नहंी होतीं तो मैं ही इस पर लिखता।’’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘‘मेरे बूते का नहीं है। जब झगड़ा कराना है तो उसके लिये कुछ ऐसा वैसा लिखना जरूरी है, और इस मामले में तुम जितने दक्ष हो मैं तो हो ही नहीं सकता।’

    गृहिणी ने दूसरे ब्लागर की तरफ देखकर कहा-‘आपने तो सारे सीन पहले ही सोच लिये है। एकदम जोरदार कहानी लग रही है। बस आपको तो शब्द ही तो भरने हैं। अभी आप यह सीन बताकर जा रहे हैं यह तो उसे भी याद नहीं रख पायेंगे।फिर लिखेंगे कहां से? आप कोशिश करो तो अच्छा लिख लोगे।’
    दोनो ने शिकंजी का ग्लास खत्म किया तो वह दोनों ग्लास उठाकर चली गयी । दूसरा ब्लागर बोला-‘‘ठीक है जब क्रिकेट मैच कराना है और उसमें एक्शन के सीन रखने हैं तो यह भी कर लेता हूं। देखो भाभीजी ने हमारा हौंसला बढ़ाया। एक तुम हो जब तब ऐसी वैसी बातें करते हो। भाभीजी बहुत भले ढंग से पेश आतीं हैं और तुम……………………छोड़ो अब तुमसे क्या कहूं

    पहले ब्लागर ने कहा-‘हां, पर याद रखना मैंने तुम्हारी उस तुम्हारी पहले और आखिरी कमेंट के बारे में उसे कुछ नहीं बताया। क्या इसके लिये मुझे धन्यवाद नहीं दोगे?
    दूसरे ने कहा-‘‘अच्छा मैं चल रहा हूं। और हां, इस ब्लागर मीट पर भी कुछ अच्छा लिख देना ताकि मेरी प्रतियोगिता को प्रचार मिले। फिर देखो तुम्हें कैसे फ्लाप से हिट बनाता हूं।’

    वह चला गया और गृहिण ने पूछा-‘‘क्या कहा उसने?’

    पहले ब्लागर ने कहा-‘तुमने भी तो सुना! यही कहा‘क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना’।’’

    फिर वह मन में सोचने लगा-‘मैने इस बार भी नहीं पूछा कि इंटरनेट पर बने ब्लाग पर मैं यह रिपोर्ट हास्य कविता के रूप में लिखूं या नहीं। चलो अगली बार पूछ लूंगा।
    नोट-यह काल्पनिक हास्य-व्यंग्य रचना है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। अगर किसी की कारिस्तानी से मेल हो जाये तो वही इसके लिये जिम्मेदार होगा। इन पंक्तियों का लेखक किसी ऐसे दूसरे ब्लागर से नही मिला।

    This entry was written by दीपक भारतदीप, posted on April 30, 2008 at 4:53 pm, filed under Deepak bharatdeep, E-patrika, Media Biz, Thought, aastha, abhivyakti, aducation, anubhuti, anugoonj, arebic, bharat, edcation, hindi megazine, hindi poem, hindi sahitya, hindi seeriyal, hindi thought, hindi tv, hindi writer, inglish, internet, kavita, mastram, online journalism, social, urdu, vyangya, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagaran, web pajab kesari, web times, writing, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भारत, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, संपादकीय, समाज, साहित्य, सूचना, सृजन, हास्य-व्यंग्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी. Bookmark the permalink. Follow any comments here with the RSS feed for this post. Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.
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    2 Comments

    हर्षवर्धन
    Posted May 1, 2008 at 1:39 am | Permalink
    दीपक बाबू बढ़िया है। आपके घर आने पर शिकंजी मिलेगी ना। भगवान करे आपके शहर में क्रिकेट में सब सनक जाएं।

    mohd jafar
    Posted June 28, 2008 at 10:30 am | Permalink
    hhjhhili


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