इस ब्लोग (पत्रिका) के बीस हजारिया होने पर विशेष संपादकीय
यह ब्लाग (पत्रिका) आज बीस हजारिया हो गया-यानि इसकी पाठक संख्या बीस हजार पार हो गयी थी। इसने दस हजार पाठक संख्या दस नवंबर 2007 को पार की थी। इस समय इस पर पोस्ट संख्या 230 के पास थी और वर्डप्रेस के ब्लोग बहुत तंग कर रहे थे तो हमने इसकी जगह एक ब्लाग और बना लिया और इसे लगभग अनदेखा कर दिया। मगर यह ब्लाग हमें देखता और दिखता रहा। अनेक बार यह बिना किसी पोस्ट लिये ही वर्डप्रेस के डेशबोर्ड पर हिट लेकर सात हिट ब्लागों की सूची में आ जाता जैसे कहता हो-‘‘भूल गये क्या? हम भी तुम्हारे एक फ्लाप ब्लाग हैं?’
तब भी हम इसकी परवाह नहीं करते थे कि इस पर कितने व्यूज आज हैं। हम दूसरे ब्लाग पर लिखते रहे जो हमने उसी महीने पंजीकृत कराया था। इस ब्लाग की अनदेखी का परिणाम हमें भोगना पड़ा। कहीं हमारे ब्लाग रेटिंग के लिये उठाये गये और इसकी जगह स्थापित उस ब्लाग की हालत खस्ता हो गयीं। तय बात है कि ब्लाग तो हमारा ही था और हम पर उसकी आंच आनी ही थी। बेटे के फेल या पास होने का बाप के मन पर प्रभाव तो पड़ता ही है। सो हमारे साथ भी हुआ।
इसके बाद भी हमने तय किया कि अब उसी ब्लाग को पास करायेंगे। यह एक बाप का ही फैसला होता है कि अपने पढ़ाई में कमजोर बच्चे को अधिक पढ़ाने का विचार करता है। हमने भी दूसरे ब्लाग पर लिखना और तेज कर दिया पर इस पर भी कभी कभार पोस्ट लिखते रहे। एक दिन हमने देखा कि इस पर तो अठारह हजार व्यूज हो रहे हैं तो आश्चर्य हुआ। हमने अपने वर्डप्रेस के बाकी ब्लाग देखे तो पाया कि यह सबसे अधिक हिट ले रहा है।
इधर एक दो दोस्त जिनको हमने इसी ब्लाग का पता दिया तो उन्होंने भी सूचना दी कि तुम्हारा वह ब्लाग बीस हजार के पार होने वाला है।
दस से बीस हजार की यात्रा में कई बार फोरमों पर हिट लेने वाला यह ब्लाग अब आम पाठकों की बढ़ती भागीदारी, उनकी पसंद और रुचियों के संकेत दे रहा है। मुझे सुबह ही आशा थी यह ब्लाग इस संख्या को पार करेगा और इसके लिये विशेष संपादकीय लिखेंगे। मैं एक पोस्ट प्रकाशित करने के बाद एक ही बार अपने ब्लाग को देखता हूं और उसके बाद कही इसको नहीं खोलता। दस हजार पार करने से पहले कभी कभी डेशबोर्ड पर इसे देखता था और शुरूआती दिनों में जब यह फोरम पर नहीं था तो इसे कुछ बार डेशबोर्ड पर खोल कर देखता था कि यह कैसा दिखता है।
दस से बीस हजार के बीच मैंने इसे कहीं भी खोलकर नहीं देखा। इसका मतलब यह है कि यह दस हजार व्यूज दूसरे लोगों को है।
इस ब्लाग पर प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण अब मैं प्रस्तुत करूंगा तब हिंदी ब्लाग में तमाम तरह के विश्लेषण कर रहे लोगों को काफी अच्छा लगेगा। यह ब्लाग जो संदेश दे रहा है उससे स्पष्ट है कि आम पाठक की रुचि हास्यकविताओं और अध्यात्म की तरफ बहुत है-ब्लाग और ब्लोगरों पर लिखी गयी पोस्ट आम पाठक उसे नहीं पढ़ना चाहते। अभी आंकड़े इस समय प्रस्तुत नहीं कर रहा पर यहां बता दूं कि इन दोनों पर लिखते हुए मुझे ऐसी सफलता मिलेगी यह आशा तो मैं कर भी नहीं रहा था पर इन नीचे लिख 19 पोस्टें और उनके हिट पर नजर डालें। क्या इनमें कोई संदेश है जिसे समझा जा सकता है।
Title Views
कबीर के दोहे:अब मन हंस की तरह मोती चुनता 355
हास्य कविता-असली इंडियन आइडियल बनूंगा 232
सास-बहू का ब्लोग-हास्य व्यंग्य 229
तरक्की का यही है खेल-हास्य कविता 203
शादी से पहले और शादी के बाद 193
मेरा परिचय=दीपक भारतदीप, ग्वालियर 187
रावण तुम कभी मर नहीं सकते-कविता 183
हास्य कविता -बीस का नोट पचास में नहीं चल 177
हास्य कविता -अल्पज्ञानी और कौवा 158
खुद ही बहकते हैं लोग-हिन्दी शायरी 152
हिंदूओं की ताकत है ध्यान और गीता का ज्ञा न 150
बाबा रामदेव की आलोचना से पहले अपने को दे 135
फिर कौन चेला और कौन गुरु-हास्य कविता 124
जमाने को दोष देते हैं 122
कंप्यूटर चलाने वालो को योग जरूर करना चाह 119
जो सहज वह ‘कबीर’ जो असहज वह गरीब है 119
प्यार से है ज्यादा जान प्यारी 116
रहीम के दोहे:कपटी की संगत से भारी शारीरि 115
संत कबीर वाणी:जीभ का रस सर्वोत्तम 115
ब्लोगवाणी पर महापुरुषों के संदेशों के इतने कम व्यूज देखकर शायद ही कोई उनको लिखना चाहे पर मैने लिखे क्योंकि मैं आम पाठक तक जाना चाहता था और उसके लिये जरूरी है तात्कालिक टिप्पणियों के मोह का त्याग। मैं इसे अपना त्याग नहीं कहता क्योंकि यह तो मेरी स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मेरे ब्लाग उसी दिशा में जा रहे हैं जहां मैं भेजना चाहता हूं।
हिंदी के मेरे से पुराने ब्लागरों का मुझे सहयोग मिला तो मैने उनकी वह आकांक्षाएं पूरीं कीं जिसकी वह अपेक्षा करते थे-मेरे हिसाब से इतनी कम अवधि में इस सफलता की आशा भी नहीं की जा सकती थी। मुझे यह कहने में झिझक नहीं है कि यह मेरा सबसे हिट ब्लाग है और फोरमों के बाहर से अपने लिये व्यूज जुटाने वाले ब्लागों (वेब साइटें नहीं )मे यह प्रमुख हैं और यकीन मानिए अपने माडरेटर के मित्रों की इस पर कोई कृपा नहीं है। मेरा मनोबल बनाये रखने के लिये अनेक ब्लागर कमेंट रखते हैं तो इस बार उनको अपने लिये नहीं बल्कि हिंदी जगत में उनके इस योगदान के लिये बधाई। याद रखिये यह ब्लाग लिखता मैं हूं पर आखिर यह कोई मेरे घर पर रहने वाला नहीं है और हिंदी भाषा की श्रीवृद्धि करता है।
इस बार मैं श्रीअनुनाद सिंह, उन्मुक्त जी, ममता श्रीवास्तव जी , परमजीत बालीजी और सागरचंद नाहर जी को खासतौर से साधुवाद देना चाहूंगा जिनके ब्लागों से विषय, तकनीकी और अन्य जानकारियां लाकर मैने इस पर लिखा। श्रीअनुनादसिंह जी ने कृतिदेव के यूनिकोड को बताकर हिंदी ब्लागिंग जगत में मेरा दूसरा दौर शुरू किया और इसी दौर में इस ब्लाग ने बीस हजारीय ब्लाग होने का श्रेय प्राप्त किया। शेष विश्लेषण बाद में।
इस ब्लोग (पत्रिका) के बीस हजारिया होने पर विशेष संपादकीय
उन्मुक्त जी
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बधाई, ज्लदी यह आंकड़ा लाख पार करे।