छद्म ब्लाग ने सास से बचाया-हास्य कविता
अंतर्जाल पर बहू ने अपना
एक ब्लाग बनाया
और अपनी सास को भी दिखाया
हंसते हुए सास ने कह दिया
‘तुम मेरे काम को देखना और
बातों को ध्यान से सुनना
फिर अपने लिये कुछ उसमें से चुनना
लिख देना तो हिट हो जायेगी
वैसा ही करना जैसा मैंने बताया’
बहू ने किया लिखना शुरू
सास को ही बनाया अपना गुरू
उसके प्रपंचों और परनिंदाओं पर लिखकर
उसने पाये जोरदार हिट
पर सास को कभी अपना ब्लाग नहीं पढ़ाया
एक दिन सास की पड़ौसन अपनी
बहू की डींंग हांक रही थी
तब उसने भी अपनी बहू के
ब्लाग के बारे मे उसे बताया
पड़ौसन बोली-‘पर तुमने कभी उसका
ब्लाग पढ़ा है
कहीं ऐसा तो नहीं
तेरे खिलाफ ही कुछ लिखती हो
वैसे भी तुम भोली दिखती हो
उड़ाती न हो तुम्हारा मजाक
जमाने भर की सासों पर बरसती हो
कर देती हो बहू की मर्यादा खाक
एक बार पढ़ लो
फिर आकर अपनी हांकना
रोती नहीं आओ तब कहना कि
मैने तुम्हें गलत बताया’
इस तरह पड़ौसन ने मंथरा का रोल निभाया
सास सीधे बहू के पास आयी
और बोली
‘बहुत दिन से सोचती रही
पर आज विचार मेरे दिल में ख्याल पक्का आया
तुमने कभी मुझे अपना ब्लाग नहीं बताया
आज पढ़ाओ देखूंगी कि
तुमने कितना हिट पाया’
पहले बहू चैंकी फिर समझते उसे
यह देर नहीं लगी कि
किसी मंथरा ने उसकी सास को भड़काया
फिर भी वह सचेत थी
सास को उसने अपना एक छद्म ब्लाग दिखाया
जिसमें थी सास-ससुर, पति और ननदों की आरती
मायके वालों का जिक्र तक नहीं था
सास को वह ब्लाग भाया
और बोली-‘‘पड़ौसी हमसे जलते हैं
देखो पड़ौसन ने मुझे कैसा भड़काया
पर तुम्हारे ब्लाग में मैने कुछ भी अपने
लिये बुरा न पाया
उससे भी अच्छा लगा कि
इसमें तुमने मायके का नाम तक नही दिखाया’
सास चली गयी
और बहुत ने अपने असली ब्लाग पर
लिख डाली सासों के विरुद्ध एक पोस्ट
शीर्षक लिखा
‘छद्म ब्लाग ने सास से बचाया’
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नोट- यह हास्यव्यंग्य रचना काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। अगर किसी कारिस्तानी से मेल खा जाये तो वही इसके लिये जिम्मेदार होगा।
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ha ha mazedar hai
वाह . अच्छी कविता.