विदुर नीति:शरीर रथ, इन्द्रियां घोडे और बुद्धि होती है सारथि

1. मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि और इंद्रियां घोड़े है। इनको सावधानी से नियंत्रण करने वाला  ही जीवन की इस यात्रा में  सुख और आनंद के साथ अपनी यात्रा पूरी कर पाता है
2.  जिस तरह अप्रशिक्षित और अनियंत्रित घोड़े अपने सारथि को गिराकर हताहत कर देते है वैसे ही अपने वश में इंद्रियां को न रख पाने लोग जीवन यात्रा के बीच में ही नष्ट हो जाते हैं।
3. जिनका अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण नहं रहता वह  अर्थ और अनर्थ के ज्ञान से वंचित रहकर अपने दुःख और सुख का ज्ञान नहीं कर पाते।

वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-सच तो यह है अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की बात कहना बहुत सरल है पर करना कठिन है। आजकल देश में अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं होती है। इसका कारण यह है कि लोगों का अपने बुद्धि रूपी सारथि को प्रशिक्षित नहीं करते। वैसे तो कहा जाता है कि जब मृत्यु आनी होती  तभी आती है पर अगर आजकल देश में सड़क हादसों की संख्या को देखें तो उनके युवाओं की मृत्यु देखकर यह भ्रम टूट जाता है। लोगों के पास वाहन आ जाता है तो अक्ल मारी जाती है। ऐसे समझते हैं कि सड़क पर बस हम ही चल रहे हैं। ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर तेज गाड़ी चलाने की निरर्थक कोशिश कर अपनी जान गंवाना इस बात का प्रतीक है कि लोग अपनी बुद्धि से काम नहीं लेते और अपनी इंद्रियों के अनियंत्रित घोड़े को सरपट दौड़ाए जाते है।

अतः आजकल जिस तरह का वातावरण बन गया है उसमें तो अपने आप पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है।

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