यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए-आलेख

अब मैं कैसे लिख रहा हूं या पहले कैसे लिखता था उसके अच्छे-बुरे को निर्णय करने का जिम्मा तो मैं कभी भी नहीं लेता पर हां यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए मुझे यह तो अनुभव हो रहा है कि अपने को अधिक सुविधाजनक अनुभव कर रहा हूं और इसका प्रभाव मेरे लिखे पर कुछ न कुछ प्रभाव तो अवश्य पड़ेगा।

एक बात मान लीजिए कि यूनिकोड में लिखने से मैंने अपनी मुक्ति पा ली है और मेरी सारी पोस्टें अब कृतिदेव फोंट से होकर आ रही हैं और लिखते हुए जो सोच रहा हूं वही आपके सामने आ रहा है। पहले लिखते हुए अगर कोई वाक्य लिखता था तो उसमें बदलाव होता था और सच कहूं तो कई बार मुझे वह प्रभावी नहीं लगते थे। यूनिकोड में चूंकि बहुत तकलीफ से लिखता था इसलिये फिर उसे मिटाना मुझे तकलीफदेह लगता था। हो सकता है कि कथ्य प्रभावी होने के कारण कई बार लोगों को भाषा शैली की तरफ ध्यान नही गया हो पर मेरे मित्रो का गया था पर वह भी इस बात को समझ गये थे और कुछ कहते नहीं थे। कई बार जल्दबाजी में गलतियां भी बहुत हुईं पर उन पर मेरा बस भी नहीं था। इसके बावजूद बहुत लिख गया। कई लोग मुझसे अपने लेखों के बारे में सवाल करते थे तो जवाब देने का मन नहीं होता था।

मुझे याद है कि मनुस्मृति पर लिखी गयी पोस्ट पर श्री अनुनाद सिंह ने लिखा था कि’’आप इसके श्लोक भी दिया करें। उस दिन मेरे मन में आया था कि उनको जवाब लिखूं कि यूनिकोड में मैं श्लोक नहीं लिख सकता और मुझसे ऐसी अपेक्षा भी न करें। मैने ऐसा नहीं किया। एक तो वह वास्तव में गंभीर व्यक्ति हैं और दूसरी उनकी सक्रियता बहुत अधिक नहीं दिखती पर जितनी है वह कम महत्वपूर्ण नहीं रही। हां अब उनको कोई भी ऐसी पोस्ट जो संस्कृत श्लोक से संबंधित होगी तो उसके श्लोक भी लिखूंगा इसमें संशय नहीं है-मनु स्मृति का एक श्लोक लिखकर मैने उनकी मांग को पूरा करने का प्रयास किया है।

जब मैं पहले लिखता था तो लोग पूछते कि ‘‘क्यों लिखते हो?’’

मेरा जवाब होता कि-‘‘मै अपने को तलाश कर रहा हूं।’’

ब्लाग पर कृतिदेव में लिखना मेरा दूसरा दौर है और सच तो यह है कि यह अब मेरी तलाश अपने दो व्यक्तित्वो की हो गयी है। एक तो आपको बता दी दूसरी मुझे अपने यूनिकोड वाले रूप की तलाश है जो मैने खो दिया है। अब मेरी लेखन यात्रा इसी तलाश पर निकली है। जिन लोगों ने मुझे ध्यान से पढ़ा होगा वह शायद कुछ अजीब अनुभव करें तो उनको बता दूं कि आजकल जो भी शब्द लिख रहा हूं उनके साथ मैं जुड़ा हुआ हूं। यूनिकोड में लिखी गयी पोस्टों से मैने अपने को थका हुआ अनुभव किया इसलिये उस पर उठाये गये सवालों का जवाब नहीं दिया। सच कहूं तो वह सवाल उठे ही इसलिये क्योंकि कहीं न कहीं मेरे शब्दों में अस्वभाविकता होती थी। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि लिखने कुछ बैठा और लिख कुछ गया पर कृतिदेव में ऐसा होना नहीं है क्योंकि इसमें लिखते हुए मुझे यह सोचना नहीं है कि मुझे अपनी पोस्ट अब खत्म करनी है-यूनिकोड में भी मैने दिल से लिखने का प्रयास किया पर उसमें मेरे हाथ और दिमाग थकने लगते थे।

मै श्रीअनुनाद सिंह का आभारी हूं जिन्होंने यह कृतिदेव टुल बताया। वैसे उन्होंने हिंदी ब्लाग जगत में जो अपनी छवि बनाई वह बेहद अच्छी है। बाकी ब्लागरों ने तो मुझे कृतिदेव से उतारकर यूनिकोड में ढकेल दिया और कहें तो मेरे लेखक को बेहोश कर दिया जिसे अब मैं उनके बताये टूल से जगा रहा हूं और यह पोस्ट भी इसलिये लिख रहा हूं ताकि ब्लाग जगत पर अनुसंधान और विवेचना कर रहे लोग इस बात को समझ सकें कि हिंदी फोंट और उनके परिवर्तित टुल किस तरह की आगे भूमिका अदा करेंगे। जिन्हें मेरी भाषा शैली में रुचि हो वह इस बात को समझ लें कि अगर उसमें कोई बदलाव है तो उसका कारण यही है कि मैं अपने स्वाभाविक रूप में लिख रहा हूं। पहले लिखने से पहले मुझे तैयारी करनी पड़ती थी पर जब आता है लिखने बैठ जाता हूं। एक बात जरूर है कि यूनिकोड में लिखी हास्य कविताएं मेरे लिये एक दिलचस्प अनुभव रहा है। इसी विषय पर आगे भी कुछ पोस्टें झेलना पड़ जायें तो कोई बात नहीं है। जब मैं आप लोगों के कहने पर यूनिकोड में लिखकर तकलीफ उठा सकता हूं तो आप भी तो इतना कर ही सकते हैं।

6 Responses to “यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए-आलेख”

  1. यूनिकोड बनाम कृतिदेव और इन्टरनेट पर हिन्दी कुछ संशय हैं।

  2. dipak ji namaskar.
    aapka bahut bahut dhanyavad. main to nirash hi ho gaya tha. fir aapka sandesh pada to nai aasha ka sanchar hua. abhi aapka bheja tool istemal karne ki himmat nahin hui. mujhe nahin maloom ki kaise usse kratidev main kampoz hoga lekin koshish avasya karoonga. aapne bilkul satya likha hai. maine bhi pahli post unicode mai hi likhi hai likhna kuchh chahta tha likh kuchh gaya.beech main hi use samapt karna pada. ek baar fir dhanyabaad.

  3. यूनिकोड में लिखने से आपका अभिप्राय नहीं समझ आया। आपका लेख तो अभी भी यूनिकोड में ही है न?

  4. मेरा आशय यह है की अब मैं सीधी यूनीकोड में नही लिख रहा हूँ यह अलग बात हैं की बाद में वह यूनीकोड में हो जाता है.
    दीपक भारतदीप

  5. ठीक है। यह बताइए कि आप पहले कैसे यूनिकोड में लिखते थे, गूगल के लिप्यन्तरण के जरिए, या इंस्क्रिप्ट या हग या किसी और विधि से?

  6. सबसे पहले मैं ब्लागस्पाट के ब्लोग के ही हिन्दी टूल का उपयोग करता था. उसके बाद इंडिक टूल का उपयोग किया और अब अपने विंडो में ही कृतिदेव में टाइप कर श्री अनुनाद सिंह के बताये टूल पर ले जाकर उसे यूनीकोड में कर ब्लोग पर लाता हूँ. मतलब यह की अब मैं हिन्दी टाइप कर अपनी पोस्ट लिख रहा हूँ पहले अंगरेजी की बोर्ड का इस्तेमाल करता था. कहने का तात्पर्य यह है की अब कोई हिन्दी टाइप करने वाला भी ब्लोग पर लिख सकता है जबकि पहले उसके लिए अंग्रेजी की बोर्ड का ज्ञान होना जरूरी था. मुझे हिन्दी की बोर्ड के इस्तेमाल से सहूलियत हो रही है.
    दीपक भारतदीप

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