जिन्दगी की मुश्किलें-कविता साहित्य

जिन्दगी में मुश्किलें आतीं है
कुछ सिखलातीं हैं तरीके
जीतने के कुछ नये सलीके
उनसे दूर रहने की कोशिश
करता हुआ इंसान दौड़ता है
इधर-उधर तंत्र-मंत्र कराने के लिए
जूझने के छोड़ देता तरीके

अपनी मुश्किल के लिए
दूसरे को जिम्मेदार ठहराना
फिर उसके हल के लिए
किसी सयाने के पास जाना
अपनी हकीकतों के मुहँ फेरकर
जालसाजों के दर खटखटाना
इससे अधिक नहीं ढूँढता तरीके

जिनको यकीन है सर्वशक्तिमान पर
खडे रहते हैं तूफानों जैसी मुश्किल में भी
एक चिराग की तरह
चढ़ जाते हैं इसी दम पर
मुश्किलों के पहाड़
रोते नहीं मारकर दहाड़
जहाँ मंडराता हो हार का तय खतरा
वहाँ जीत का नतीजा निकालकर बताते
तन में तंत्र, मन में मंत्र और
अपनी शक्ति ही है यंत्र
जीवन में अजेय रहने के
छिपे हैं इन्हीं में तरीके

2 Comments

  1. Posted February 11, 2008 at 4:38 PM | Permalink

    मुश्किलों का सामना कर, जिंदगी की राह में आगे बढ़ते रहें यही तो है जिंदगी का फलसफा।

  2. mehhekk
    Posted February 12, 2008 at 5:01 PM | Permalink

    bahut badhiya rachana,sahi zindagi ka samna to khud hi karna padhta hai.


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