सास-बहू का ब्लोग-हास्य व्यंग्य

एक ब्लोगर पहुंचा अपने गुरु के पास और बोला कि”गुरूजी मेरी ब्लोग साधना में बहुत दिक्कत आ रही है. मेरे पत्नी और माँ दोनों अलग-अलग कमरे में बैठकर सास-बहु सीरियल के अलग-अलग चैनल देखती हैं पर अगर माँ अपने सीरियल में अगत किसी बहू को नकारात्मक रूप में देखती है तो जोर-जोर से बहुओं के बारे में तमाम बातें चिल्लाकर कहती है और उस पर मेरी पत्नी गुस्से में झगडे करने पर आमादा हो जाती है और अगर मेरी पत्नी किसी धारावाहिक में सास के किरदार को खलपात्र के रूप में देखती है तो वह सासों पर बरसती है. इस झगडे में मैं अपने ब्लोग पर लिख नहीं पाता.”

गुरूजी ने कहा-”तुम ऐसा करो कंप्यूटर पर अपनी पत्नी को भी ब्लोग लिखना सिखा दो. जब वह ब्लोग लिखेगी तो उसे टीवी पर सास-बहू के सीरियल देखने का मौका नहीं मिलेगा तब झगडा करने का अवसर मिलने का सवाल ही नहीं.’

ब्लोगर घर आया और अपनी पत्नी से बोला-”आजकल तो ब्लोग पर लिखने का ज़माना आ गया है. मेरे सब दोस्त हैं उनकी पत्नियों ने ब्लोग बनाया है और उस पर खूब लिखती हैं. तुम भी लिखा करो.

पत्नी ने पूछा-’पर वह लिखतीं क्या है?’
ब्लोग ने झूठ-मूठ कहा-’कुछ नहीं. अपने घर की बातें. आखिर वह ईमेल का विस्तार है. सब आपस में चर्चा करती हैं.”

पत्नी ने कहा-”ठीक है. अब अगर ब्लोग लिखने का फैशन आ गया है तो मैं भी अब लिखूँगी.

ब्लोगर ने उसे सारी विधि सिखा दी. उधर ब्लोगर की माँ को पता लगा तो उसने अपने बेटे से जिद की. मजबूर होकर उसे एक और कंप्यूटर खरीदना पडा. इतना ही नहीं माँ के लिए ब्लोग पर टाईप करने वाले एक लड़के का भी इंतजाम आकर कर दिया. वह कम वेतन पर इसलिए तैयार हुआ कि वह भी अपना ब्लोग बनाएगा.

ब्लोगर बेचारा शाम को अपने कार्यालय से आकर कंप्यूटर पर बैठता और किसी तरह लिखता. माँ और पत्नी ब्लोग बनाने और लिखने में कुछ दिन व्यस्त रहीं तो उसे बड़ा सुकून महसूस हुआ पर वह अधिक दिन नहीं रहा. अब वह घर लौटता तो न केवल दोनों एक दूसरे के ब्लोग पर कूडा लिखने का आरोप लगातीं बल्कि एक दूसरे के विरुद्ध अभद्र कमेन्ट की शिकायत भीं करतीं . ब्लोगर ने दोनों के ब्लोग देखे. बहू के ब्लोग पर सास विरोधी और सास के ब्लोग पर बहू विरोधी सामग्री धड़ल्ले से लिखी गयी थी. दोनों ने एक दूसरे के ब्लोग पर वैसी ही कमेन्ट रखी थी जैसे पहले झगडे के दौरान एक दूसरे के लिए जुबान से कहतीं थीं. अब तो झगडा और बढ गया था. पहले तो झगडे में ब्लोगर कुछ लिख भी लेता पर अब तो वह भी उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था.

ब्लोगर फिर पहुंचा अपने गुरु के पास तो उसने कहा-”मैंने तुम्हें अपनी पत्नी को ब्लोग पर लिखने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा था न कि माँ को, और बहू को भी सारी विधि बताने का भी कोई निर्देश नहीं दिया था. अगर दोनों ने बना ही लिया तो तुम्हें दोनों को कमेन्ट लिखना तो बताना ही नहीं था और दोनों को एक दूसरे के ब्लोग पढ़ने का अवसर ने मिले उतना ही ज्ञान देना था. अब यह बताओ दोनों एक दूसरे के ब्लोग तक पहुँची कैसे?’
ब्लोगर बोला-” महाराज दोनों के टेग में सास-बहू था और कोई फोरम हैं वहाँ पर सास-बहू के ब्लोग दिखते हैं. मेरी पत्नी तो नये जमाने की है उसने वहाँ अपना ब्लोग पहुंचा दिया और मेरी माँ भी पढी-लिखी है कुछ तो कंप्यूटर के बारे में जानती थी और थोडा बहुत टाईप भी उनको कभी आता था पर अपना ब्लोग नहीं बना सकती थी. एक सहायक उनके लिए रखा. वह सहायक बहुत तेज है उनसे अपना ब्लोग बनाने के चक्कर में कम वेतन लिया और मेरी माँ ब्लोग भी उसने ही वहाँ पहुचना दिया और खुद उसका ब्लोग भी खूब चल रहा है.”

गुरु ने कहा-”अब तुम अपने इंटरनेट कनेक्शन को कुछ दिन हटा लो. फिर उनको सास-बहू के सीरियल देखने दो. इस ब्लोगबाजी में तो तुम्हारे झगडे और बढ़ जायेंगे. सीरियल में तो कुछ देर दोनों के आपसी संपर्क कटे रहते हैं पर इसमें तो सतत संपर्क रहेगा तो झगडा भी अधिक होगा. ”

ब्लोगर बोला-”मैं वैसे ही फ्लॉप हूँ और कुछ दिन इंटरनेट कनेक्शन कटवाया तो गुमशुदा ब्लोगरों की श्रेणी में आ जाऊंगा.”
गुरूजी ने कहा-”वहाँ फिर तुम मेहनत कर दोबारा अपना मुकाम हासिल कर सकते हो. अगर नहीं कटवाया तो गुमशुदा ब्लोगरों की श्रेणी में आने की बजाय गुमशुदा ब्लोगरों की सूची में आ जाओगे. तुम्हारे घर से हर रोज तुम्हारा पता देने के लिए पोस्ट जारी होगी. नाम तो तुम्हारा तब भी चलेगा पर तुम गुमशुदा रहोगे.”
बिचारा ब्लोगर अपना मुहँ लेकर रह गया. अब उसके पास इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था.

नोट-यह एक काल्पनिक हास्य-व्यंग्य रचना है और किसी व्यक्ति या घटना से इसका कोई लेना-देना नहीं है. अगर किसी से मेल खा जाये तो उसके लिए वही जिम्मेदार होगा.

4 Responses to “सास-बहू का ब्लोग-हास्य व्यंग्य”

  1. barbas muskurahat aagayi chehere par,bahut achha vyang hai.

  2. सटीक व्यंग्य ………मजेदार

  3. sir apake saas bahu ki rachna se main bahut hi prabhawit hua aur maine kahin suna tha
    ‘patni ke pahle afair ko jankar uskee pati ne use khub latada’
    dusre afair ko jankar sasur ne bhi fatkara,
    lekin teesre afair ko jankar bhi saas ne use kuch nahi kaha ‘ kyonki saas bhi kabhi bahu thi’.

  4. sir apake saas bahu ki rachna se main bahut hi prabhawit hua aur maine kahin suna tha
    ‘patni ke pahle afair ko jankar uskee pati ne use khub latada’
    dusre afair ko jankar sasur ne bhi fatkara,
    lekin teesre afair ko jankar bhi saas ne use kuch nahi kaha ‘ kyonki saas bhi kabhi bahu thi’.
    thanks

Leave a Reply