शैतान के सम्मान की माया-हास्य कविता

साधू के आश्रम में पहुंचकर शैतान ने
अपनी चाल का जाल बिछाया
उसके सब चेलों को अलग-अलग बुलाकर
‘सर्वश्रेष्ठ चेले’ का सम्मान दिलाने का
लुभावना सपना दिखाया

इधर शैतान निकला
सभी चेले उसके पीछे भागे
भूल गए गुरु का यह सन्देश
”लालच बुरी बला है’
कुछ भी उनको समझ में नहीं आया

आगे-आगे शैतान
पीछे-पीछे चेले दौड़ते जाते
सम्मान की मैराथन दौड़ लगी हो
ऐसे गति बढाते जाते
कहीं अंत नजर नहीं आया

जब वह थकने लगे
तब रुक गया शैतान और मुस्कराया
और कुछ रंग बिरंगे कागज़
पेन और कुछ पत्थर के सिक्के
उनकी तरफ बढाते हुए बोला
”लो यह सब सम्मान
तुम सब ही नंबर वन हो
मैंने अपना फर्ज निभाया”

चेलों ने उससे सामान अपने हाथ में लिया
शैतान फिर वहाँ नज़र नहीं आया
कागज पर चेलों की तारीफ के शब्द थे बहुत
पर फिर भी उनका मन खाली था
पर इस सम्मान का मतलब
अब शिष्यों के समझ में आया
‘इस शैतान ने हमारे गुरु की
तपस्या में भंग करने का षड़यंत्र रचाया’

लौट के साधू के आश्रम पर चेले आये
तो वह मुस्कराये और बोले
”यह सम्मान का खेल
तुम्हारे बूते का नहीं है
या ज्ञान छोड़ दो या सम्मान पाने की चाहत
वरना कभी अपमान से भी होगे आहत
अपनी काबलियत पर यकीन करो
दुनिया में बिखेरों अपनी शक्ति और भक्ति
बाजार में जो बिक सकता है
उसके लिए ही कोई सम्मान के शब्द लिखता है
खुद में ही देखो अपने को
भूल जाओ यह सब
यह तो थी शैतान के सम्मान की माया
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2 Responses to “शैतान के सम्मान की माया-हास्य कविता”

  1. बिलकुल सही कहा आपने…..
    सबको एक-एक झुनझुना थमा अपना उल्लू सीधा करते आए हैँ लोग ।

    राजेश खन्ना की पुरानी फिल्म”आज का एम.एल.ए राम अवतार” देखी होगी शायद आपने। उसमें भी सबको उपमुख्यमंत्री बनाने का लालच दे कर राजेश खन्ना सभी एम.एल.ए अपनी तरफ कर लेता है और राजनीति की ए बी सी तक ना जानने वाला एक नाई(राजेश खन्ना) खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो जाता है।

    ये हरियाणा की राजनीति से प्रेरित फिल्म थी…वहाँ ऐसा ही कुछ भजन लाल जी ने भी किया था

  2. ek dam sahi,satik varana hai,sacchai ka drashan karata.sab logo ko sikhana kaam chahiye aur naam bada chahte hai.khudki nazaron mein girkar bada banana chahte hai.self respect bhi bhul jate hai.

    sadhu wad bhul jate hai.

    very great message is hidden in this poem,superb creation.

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