सुन्दर शब्द का सृजन, सबके नसीब नहीं होते

शब्द कभी स्वयं कभी बीभत्स नहीं होते
डरा देते हैं उनके भाव, अगर कोई बोले रोते .
जो ख्वाहिशों वास्ते कत्ल करते किसी की आह
उनको जिन्दगी में सुख के पल नसीब नहीं होते.
किताबों में लिखा बहुत सच है, पर पढे तो कोई
पढ़कर अगर नहीं समझे तो शब्द भी व्यर्थ होते .
बेबस और कमजोर की बददुआ में होती है ताकत
रूह से निकले शब्द कभी कमजोर नहीं होते .
कभी भी हो सकता है, कमजोर और बेबस कोई
उसमें गरीब और अमीर के बहुत भेद नहीं होते.
लिख सको कोई सुन्दर शब्द, बहुत बेहतर होगा
सुन्दर शब्द का सृजन, सबके नसीब नहीं होते.
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3 Comments

  1. Posted January 18, 2008 at 1:43 PM | Permalink

    बहुत ही यथार्थ और सटीक रचना।

  2. Posted January 18, 2008 at 4:42 PM | Permalink

    सुन्दर शब्द का सृजन, सबके नसीब नहीं होते. –सत्य वचन. सुन्दर शब्दों की आत्मा भी सुन्दर हो तो भाव की सुन्दरता में चार चाँद लग जाते हैं.

  3. Posted January 18, 2008 at 5:52 PM | Permalink

    shandar shabdh


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