नो कमेन्ट
कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया
जोश में आकर उसने लिखा
अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र
इकतरफा प्रेम ने उसे बनाया शायर
बहुत दिन तक सड़क किनारे खडे होकर
वह अपनी प्रियतमा को देखता
उसका दिल फिर भी नहीं आया
शायर बन गया ब्लोगर
उसकी कविताओं ने जमकर हिट पाया
‘प्रियतमा तुम मेरा ब्लोग पढ़ लो
देखो तुम पर कवितायेँ लिखते
कितना हिट हो गया हूँ
कमेन्ट में मैंने कीर्तिमान बनाया
तुम अब पसीज जाओ
मेरे इस प्रेम पत्र पर
प्रेम भरी कमेन्ट लगाओ
बस यही कमी रह गई है
वैसे मैंने खूब नाम कमाया’
लौटती डाक से जवाब आया
उसने लिफाफा खोला
और अपने ही पत्र के नीचे
‘नो कमेंट’ लिखा पाया
हतप्रभ ब्लोगर चिल्लाने लगा
“कैसा है यह ऊपर वाले का खेल
जिसके लिए इम्तहान देकर पास किया
वही कर गई फेल
उसके प्रेम में कितनी कवितायेँ लिखीं
कमेन्ट का अंबार लगाया
उसी ने ‘नो कमेन्ट’ का बोर्ड दिखाया”
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चारों तरह फिक्सिगं का खेल है
अब तो खेलों पर क्या
जंगों पर यकीन नहीं होता
गोली कोई चलाता है
निशाना लगाने वाले कोई और होता है
दौलत का अंबार लगाने की दौड़
में सब लोग हैं शामिल
जजबात बेचना उनके लिए खेल है
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