रहीम के दोहे:बुरे वक्त में राम का नाम ही सहायक

जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल
तौ काहे  कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल

कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीकृष्ण का अपनी मातृभूमि और वहाँ रहने वाले लोगों से इतना प्रेम था कि उन्होने उनकी रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठा लिया-अगर उन्हें अपनी मातृभूमि किसी और को देंती होती तो वह पर्वत  किसलिए उठाते.
भाव-उनका भाव यही  है कि लोगों को अपनी मातृभूमि और वहाँ रहने वाले लोगों से प्रेम करना चाहिए भले ही कहीं भी रहते हों. भगवान् श्री कृष्ण बाद में द्वारका में रहने लगे थे पर उनका प्रेम और स्नेह अपनी मातृभूमि  और वहाँ रहने वाले लोगों के प्रति सतत रूप से बना रहा.

जैसी तुम हमसौं करी, करी करो जो तीर
बाढे दिन के मीत हौ, गाढे दिन रघुवीर

जैसे नदी के तट पर बैठकर व्यक्ति विश्राम करता उसी प्रकार तुमने अपने हित के लिए संपर्क रखा. तुम तो अच्छे दिनों के साथी हो. विपति में तो भगवान् राम ही सहायक होते हैं.

भाव-उनका आशय यही है कि भगवान के निकट रहने से मनुष्य को सुख प्राप्त होता है जैसे कोई यात्री थक जाने पर नदी के किनारे बैठकर विश्राम करता है और फिर वहाँ से चला जाता है उसी तरह अच्छे समय में कई मित्र बनते हैं पर बुरे समय में तो राम का नाम ही सहायक होता है.

One Comment

  1. Posted February 13, 2008 at 6:37 AM | Permalink

    Iam B.A first year student I need english and hindi transalation of kabir das poen It is about guru.It is the 1st chapter . Iam studing in mysore open university.


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