रहीम के दोहे:घोडे में है महानता का गुण

यों रहीम गति बडेन की ज्यों तुरंग व्यवहार
दाग दिवावत आपु तन, सही होत असवार

कविवर रहीम कहते हैं की घोडे की भाँती महान पुरुषों का व्यवहार होता है, जैसे-घोडा स्वयं चोट खाकर भी अपने सवार को बचाता है. उसी प्रकार महान व्यक्ति परोपकार करते हैं भले ही स्वयं कलंकित होते हैं.

रहिमन अपने गोत को, सबै चहत उत्साह
मृग उछरत आकाश को, भूमि खनत बराह

कविवर रहीम कहते हैं की यहाँ सभी जीव अपने कुल गोत्र की वृद्धि के लिए उछलते हैं. हिरन आकाश तक उछलते हैं और सूअर पृथ्वी खोदते हैं.

भाव-यहाँ उनका आश्य मनुष्य की तरफ भी है जो आपनी जाति और संप्रदाय की वृद्धि के लिए प्रयास करता है.

2 Responses to “रहीम के दोहे:घोडे में है महानता का गुण”

  1. गोत्र क्या है?
    गोत्र का इतिहास क्या है?
    एक समान गोत्र मे शादि करना कितना सही,कितना गलत है ?

    मै(जोगी/चोहान)अपनी हि जाति कि लडकी के साथ शादि करना चाहता हू किन्तु लडकी के पिताजी(जोगी /गोड) मेरी ही जाति मे किसी के गोद गये है और जिस परिवार मे गोद गये है उन्का गोत्र भी चोहान है। समान गोत्र होने के कारण लडकी के परिवार वाले शादि से इन्कार कर रहे है।

    क्या यह सही है?

    मुझे उदाहरण तथा वैग्यानिक तथ्य सहित उत्तर दे ।

    मै -रवि योगी
    योग्यता -जी ऐन ऐम नर्स
    आयु -२३ वर्ष

    लडकी -रानी योगी
    योग्यता -ऐम ऐ,बी ऐड
    आयु -२१ वर्ष

  2. ID - ggjel@yahoo.com

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