सात समंदर भी कम होंगे

अगर सुबह का भूला शाम को
घर लौट आये तो बुद्धिमान कहलाता
पर रात को जो भटका घर लौटे तो
उसको माफ़ क्यों नहीं किया जाता
शायद आदमी के पाप सूरज की अग्नि में
जलकर राख हो जाते हैं पर
रात को अंधियारे में चाँद की तरह लगा दाग
कभी नहीं मिट पाता
इसीलिए भी रात का भटका
कभी घर वापस नहीं आता
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एक घूँट मिले तो ग्लास चाहिए
ग्लास मिले तो गागर चाहिए
गागर मिले तो सागर चाहिए
प्यास अगर पानी से बुझने वाली होती तो
कोई जंग नहीं होती
पर जो पैसे से बुझती है
उसको बुझाने के लिए तो
सात समंदर भी कम होंगे
उसके लिए तो दिल को तसल्ली
देने के लिए कोई अच्छा ख्याल चाहिए
आदमी को पैगाम पर पैगाम देने कुछ नहीं होगा
उन पर अमल करने का जज्बा चाहिए

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