आर्थिक लाभ का चक्कर
दोस्त ने कहा
‘रुक जाओ
इतनी भी क्या है जल्दी
भला कहाँ तुम्हें जाना है’
उन्होंने जवाब दिया
‘यार आज जल्दी
बीमा पालिसी की
किश्त जमा करवाना है
दोस्त ने कहा
‘फ़िर तुम इतनी फिक्र
क्यों करते हो
तुम्हारे घर के अन्य सदस्यों को
इसकी फिक्र करना चाहिए
तुम्हारे बाद उनको ही तो
आर्थिक फायदा पाना है’
उन्होंने जवाब दिया
‘यार, जो मेरे नाम की है
उसकी तो फिक्र सब करते हैं
पर जो उनके नाम पर है
उसकी फिक्र तो मुझे करनी है
भगवान् करे सब ठीक रहें
पर कुछ हो गया तो उनका
आर्थिक लाभ तो मुझे ही पाना है.
————————————–
Filed under: Blogroll, Dashboard, Deepak bharatdeep, E-patrika, Global Dashboard, aducation, arbe, bharat, edcation, hasya kavita, hindi megazine, hindi sahitya, hindi story, hindi tv, hindi writer, india, inglish, kavita, knowledge, media, shayri, urdu, web duniya, web jagaran, web pajab kesari, web times, writing, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य चिंतन, शेर, शेर-ओ-शायरी, साहित्य, सूचना, सृजन, हास्य-व्यंग्य, हिंदी साहित्य | Tagged: , जीवन, व्यंग्य, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी, hasya kavita, hindi, vyangy