सड़क दुर्घटनाएं और भविष्यवाणियाँ

उस दिन एक आदमी दूसरे से कह रहा था कि ‘एक ज्योतिषी ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि अमुक तारीख से लेकर अमुक समय तक देश के लिए समय भारी है और इसमें बहुत सारे सड़क हादसे भी होंगे.अब देखो रोज कोई न कोई ऐसी दुर्घटना हो रही है. अखबार ऐसी ही ख़बरों से रंगे पड़े हैं.’

भारत का ज्योतिष एक विज्ञान है पर इसकी आड़ में कई लोगों ने पैसा और नाम कमाने के चक्कर में इसे बदनाम कर दिया है, और वह स्वाभाविक रूप से होने वाली घटनाओं का पूर्व में आंकलन कर उसे इस तरह प्रस्तुत करते हैं जैसे कोई बहुत बड़ी भविष्यवाणी कर रहे हों. स्वाभाविक रूप से उसने जो तारीखें बताई उस समय हमारे देश में मंदिरों और बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है. ग्रीष्म और वर्षा काल में आदमी बहुत कम घर से निकलना बहुत काम चाहता है. जैसे ही वर्षाकाल समाप्त होता है हमारे देश में त्योहारों का दौर शुरू होता है. इस समय देश में नवरात्रि के दिन चल रहे हैं, और हमारे देश में हर शहर में कोई न कोई ऐसा प्रसिद्ध मंदिर जरूर होता है जहाँ दर्शन करने के लिए उसके आसपास के शहरों और गाँवों के लोग झुंड के झुंड बनाकर चलते हैं. एक तो ग्रीष्म और वर्षाकाल में अपने घरों में दुबके लोगों के मन में बदलते मौसम की उमंग होती है और फिर भक्ति भाव से वह लोग चहल पहल करने चल देते हैं-तीज-त्यौहार की वहज से व्यापार बढ़ने की संभावना से बडे भार वाहकों की आवाजाही भी बढ़ जाती है. इसी तरह अन्य लोग भी दशहरा और दीपावली पर बाजार से नया सामान खरीदने निकलते हैं ऐसी स्थिति में सब जगह भीड़ होती है. गाडियाँ टकराने से कई जगह लोगों में आपसी विवाद भी होता है पर कहीं बड़ी दुर्घटना होती है तो उसकी खबर अखबारों में छपती है. आजकल तीव्र गति के वाहनों के चलाने और ट्रैफिक के नियमों का पालन न करने से दुर्घटनाएं बहुत होने लगी हैं और मोटर साइकिल चलाने वाले तो तय ही कर चुके हैं जब तक पुलिस वाले डंडा नहीं घुमाएंगे तब तक हेल्मेंट नहीं पहनेंगे और सबसे ज्यादा खबरें ऐसे ही चालकों की होतीं हैं. अभी एक अखबार में मैंने ऐसे दुपहिया चालकों के रिश्तेदारों की मार्मिक अपील अखबार में पढी थी जिनकी सड़क हादसे में मौत हुई थी और वह हेलमेट नहीं पहने हुए थे. उन रिश्तेदारों ने सब लोगों से हेलमेट पहनकर वाहन चलने की अपील की थी. मुझे ताज्जुब होता है कि सब कुछ जानते हुए भी लोग इस तरफ ध्यान नहीं देते.

वैसे तो देश में ऐसा कोई दिन नहीं होता जो दुर्घटना में लोग काल कलवित न होते हों पर भीड़-भाड़ वाले दिनों में सड़क हादसे कुछ अधिक ही हो जाते है पर कुछ तथाकथित ज्योतिष ऐसी भविष्यवाणी कर अपने को सही साबित करना चाहते हैं. वह सफल इसलिए होते हैं कि लोग जागरूक होकर दुर्घटना से बचने के लिए वह सावधानी नहीं बरतते और साथ उतावलापन करते हैं. एक बात और वह यह कि बडे मार्ग जहाँ बस और ट्रक चलते हैं उनमें अपने छोटे वाहन भी इस तरह चलते हैं जैसे शहर में चलाते हैं जहाँ तीव्र गति से चलने वाले वाहनों से कम ही वास्ता पड़ता है. वैसे तो अगर शहर से थोडी दूर स्थित दूसरे शहर या गाँव जाने के लिए बस उपलब्ध हों वहाँ अपने छोटे वाहन ले जाना कुछ लोग गलत मानते हैं क्योंकि उसमें थकावट और मानसिक तनाव भी वाहन का संतुलन गड़बड़ कर देते हैं. जहाँ रेल का सफर और हवाई जहाज से जाया जा सकता है वहाँ अपनी कार ले जाना भी कुछ लोग पसंद नहीं करते. देश में सड़क दुर्घटनाओं की खबरें आम हो गईं है इससे कई परिवार झेल चुके हैं और वह अन्य लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हैं पर जिनके पास लोहे लंगर से बने वाहन नये-नये आये होते हैं उनको लगता है कि हमने सड़क भी खरीद ली है.

कुल मिलाकर बात यह है कि इन सड़क दुर्घटनाओं के मद्दे नजर किसी ज्योतिषी की भविष्यवाणी कि परवाह किये बिना सब जगह स्थानीय प्रशासन पहले ही बढ़ती भीड़ को देखकर ऐसी दुर्घटनाओं से निपटने के लिए अपने इंतजाम महत्वपूर्ण जगहों पर करने लगता है पर सड़क पर आदमी को खुद भी तो यह सोचकर चलना चाहिए कि इस पर और भी लोग और वाहन चलते हैं. अगर वह लोग ऐसा करें तो तथाकथित ज्योतिषियों को ऐसी भी भविष्यवाणी करने का अवसर ही न मिले.

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