संत कबीर वाणी: बिना विचारे बोलना नासमझी
मुख आवै सोई कहै, बोलै नहीं विचार
हते पराई आतमा, जीभ बाँधि तलवार
कुछ नासमझ लोग ऐसे हैं, जो विचारकर नहीं बोलते। बस अपनी मनमर्जी से उलटा -सीधा जो भी मुहँ में आया बोलने लग जाते है। ऐसे लोग अपनी जीभ में कड़वे और कठोर वचन रूपी तलवार बांधकर दूसरों की आत्मा को कष्ट देते रहते हैं। ऐसे लोगों को अमानवीय प्रवृति का ही कहा जा सकता है।
साधू सिद्ध बहु अंतरा, साधू मता प्रचंड
सिद्ध जू बारे आपको, साधू तारे नौ खण्ड
संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि साधू और सिद्ध में अन्तर है, दोनों में साधू ही श्रेष्ठ है। सिद्ध तो केवल अपना ही कल्याण करता है लेकिन साधू लोग पूरे विश्व का उद्धार करते हैं।
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