कंप्यूटर चलाने वालो को योग जरूर करना चाहिए


      आजकल पूरे विश्व के साथ देश में भी कम्प्यूटर का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। यह अच्छा भी है और बुरा भी। चूंकि हम भारतीयों की आदत है की हम किसी भी साधन को सध्या समझ लेते हैं और उसका उपयोग चाहे जैसे करने लगते हैं। आजकल कंप्यूटर, मोबाइल तथा पेट्रोल चालित वाहों का उपयोग हम सुविधा के लिए कम विलासिता के लिए अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे शारीरिक और मानसिक विकारों में बढ़ोतरी होने से स्वास्थ विशेषज्ञ बहुत चिंतित हैं।
       ऐसे में पूरे विश्व में भारतीय योग विद्या के निरंतर लोकप्रिय होने का ऐक कारण यह भी है कि मानव जीवन धीरे-धीरे प्रकृति से दूर होता जा रहा है और ऎसी वस्तुओं का उपयोग बढ़ता जा रहा है जो हमारे शरीर के लिए तकलीफ देह होतीं है। हम यहाँ यहाँ किसी अन्य के बात न करते हुए सीधे कंप्यूटर की बात करेंगे। यह तो अलग से चर्चा का विषय है की कितने लोग इसे सुविधा की तरह और कितने विलासिता की तरह उपयोग कर रहे हैं पर इसकी वजह से जो भारी शारीरिक और मानसिक हानि पहुंचती है उसकी चर्चा विशेषज्ञ अक्सर करते हैं। इधर हम कुछ दिनों से कुछ दिनों से कम्प्यूटर और इंटरनेट पर कम करने वाले लोगों की निराशाजनक अभिव्यक्ति को भी देख रहे हैं। इसलिये सोचा कि आज यह बात स्पष्ट कर दें की कि हम अच्छा या बुरा जैसे भी लिख पा रह हैं उसका कारण इस स्थूल शरीर से प्रतिदिन की जाने वाले योगासन और ध्यान से से मिलने वाली शारीरिक और मानसिक ऊर्जा ही है। हालांकि अनेक कारणों से कुछ आसन और प्राणायाम अवधि कम जरूर हुई है पर ऐक बात साफ दिखाई देती है कि इस कम अवधि में भी प्रतिदिन अपने उत्पन्न होने वाले विकारों को निकालने में सफलता मिल जाती है। जब कंप्यूटर पर आते हैं तो ऐसा लगता ही नहीं है कि कल हमने इस पर कुछ काम किया था। ऐसा नहीं है कि हमें कोई स्मृति दोष है जो भूल जाते हैं । हमारा आशय यह है कि जो थकावट कल प्राप्त हुई थी उसे भूल चुके होते हैं। आप में कई लोग होंगे जिन्हे याद होगा कि कल कितना थक गए होंगे, इसका मतलब है कि अब आपको योग साधना शुरू कर देना चाहिऐ। मनुष्य को प्रतिदिन मानसिक और शारीरिक रुप से ताजगी देने के लिए इसके अलावा और भी कोई उपाय है इस पर हम जैसे लोग यकीन नहीं करते।
        पहले हम यहाँ यहाँ स्पष्ट कर दें कि हम कोई योग शिक्षक नहीं हैं और इस स्थूल देह से यह योग साधना पिछले साढ़े साढ़े आठ वर्षों से की जा रहीं है। यह ब्लॉग योगसाधना चार वर्ष करने के बाद प्रारभ हुआ था और अब इसे भी चार वर्ष से ऊपर समय हो गया  है। हमारे गुरू एक सरकारी कर्मचारी हैं और बाकायदा पेंट शर्ट पहनकर घूमने वाले आदमी हैं। मतलब यह जरूरी नहीं है कि धार्मिक भगवा धारी संत ही योग साधना सिखाते हैं बल्कि कुछ लोग ऐसे हैं भी हैं जो सामान्य जीवन में रहते हुए भी योग साधना सिखा रहे हैं।
हमारे देश में इस समय बाबा रामदेव ने इसका बहुत प्रचार किया है और उनकी वजह से भारतीय योग को विश्व में बहुत प्रसिद्धि भी मिली है। उनके अलावा भी कई संत हैं जो इसमे अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं, इनमे श्री लाल जीं महाराज भी हैं।
       इसके अलावा भारतीय योग संस्थान भी इसमे बहुत सक्रिय है और इस लेखक ने उनके शिविर में ही योग साधना करना सीखा था। इसकी शाखाए देश में कई स्थानों पर लगतीं है और जो इस लेख को पढ़कर योग साधना करने के इच्छुक हौं वह अगर पता करेंगे तो उन्हें अपने आसपास इससे संबंधित शिविर जरूर मिल जायेंगे।
      हम टीवी पर संत बाबा रामदेव और श्री लाल महाराज तथा अन्य गुरुओं को  बहुत समय तक योग साधना कराते हुए देखते हैं तो यह वहम हो जाता है कि सारे आसन कर ही हम अपनी शारीरिक व्याधियों से छुटकारा पा सकते हैं पर दो घंटे का कार्यक्रम करना हमें मुशिकल लगता है। दूसरा यह भी लगता है कि योग केवल व्याधियों से छुटकारा पाने के लिए है और हम तो ठीकठाक हैं फिर क्यों करें? यहाँ हम स्पष्ट कर दें कि ऐक तो हम सुबह ज्यादा नहीं तो पन्द्रह मिनट ही प्राणायाम करें तो भी हमें बहुत राहत मिलती है। दूसरा यह कि यह कि योग साधना से शरीर की व्याधिया दूर होती हैं यह ऐक छोटी बात है। वास्तविकता तो यह है है जीवन में प्रसन्न रहने का इसके अलावा अन्य कोइ उपाय हम तो नहीं देखते। यह तो जीवन जीने की कला है।

      इस ब्लोग पर हम इसी विषय पर आगे भी लिखते रहेंगे पर अभी यहाँ बताना जरूरी हैं कि योगासन से शरीर, प्राणायाम से मन और ध्यान से विचारों के विकार दूर होते हैं। हमें सुबह उठकर खुली जगह पर कुछ बिछाकर उस पर बैठ जाना चाहिऐ और धीरे-धीरे पेट को पिचकना चाहिऐ और अनुलोम-विलोम प्राणायाम करना चाहिऐ। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या अन्य कोई बीमारी  न हो तो इसी दौरान अन्दर और बाहर कुछ क्षणों के लिए सांस रोक सकते हैं तो यही नाड़ी   शोधन प्राणायाम कहलायेगा। संस अंदर और बाहर रोकने कि प्रक्रिया को कुंभक लगाना भी कहा जाता है। जब हम थोडा पेट पिचकाएँगे तो ऐसा लगेगा कि हमारे शरीर में रक्तप्रवाह तेज हो रहा है और कुछ देर में आंखों को सुख की अनुभूति होने लगेगी ।
         कंप्यूटर पर काम करते हुए     हमारे मस्तिष्क और आंखों बहुत कष्ट उठाना पडता है, और केवल निद्रा से उसे राहत नहीं मिल सकती और न ही सुबह घूमने से कोई अधिक लाभ हो पाता है। इसके अलावा कम करते हुए कुछ देर ध्यान लगाएं तो भी थकावट दूर हो जाएगी। आखिर में हम यही कहना चाहेंगे कि अगर आप कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं तो खुश रहने के लिए योग साधना और ध्यान अवश्य करो -इससे ज्यादा और जल्द लाभ होगा। इसके अलावा प्रतिदिन नवीनता का अनुभव होगा। कभी बोरियत का अनुभव नहीं होगा। 

कवि, लेखक और संपादक-दीपक “भारतदीप” ,ग्वालियर 
poet,writter and editor-Deepak “BharatDeep”,Gwalior
http://rajlekh-hindi.blogspot.com

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका

4.दीपकबापू कहिन 
५.हिन्दी पत्रिका 
६.ईपत्रिका 
७.शब्द पत्रिका 
८.जागरण पत्रिका 
९.हिन्दी सरिता पत्रिका

Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

टिप्पणियाँ

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 80 other followers