मनु स्मृति:आग और पानी की पवित्रता बनाए रखें




- आग को मुहँ से नहीं फूंकना चाहिए। आग में मल-मूत्र नहीं फैंकना चाहिए तथा आग के सामने पैर रखकर तापना नहीं चाहिए।
- आग को किसी तरह के सामान (जैसे-मेज, कुर्सी, पलंग आदि) के नीचे नहीं रखना चाहिए, न आग को लांघना चाहिए और न ही कोइ ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे जीव हिंसा का भय हो।
- जो आग सूरज, चांद ,पानी मनुष्य, गाय और हवा के सामने मल-मूत्र का त्याग करता है उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है।
- संध्याकाळ में भोजन भक्षण, यात्रा और विश्राम नहीं करना चाहिए और अपने गले में पहने हुई माला को नहीं उतरना चाहिऐ।
- जल में मल -मूत्र, कूडा,रक्त तथा विष आदि नहीं बहाना चाहिए, इससे पानी प्रदूषित हो जाता है, पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
- बद्धिमान व्यक्ति पानी पीती गाय को न तो स्वयं हांकते हैं न किसी को हांकने के लिए कहते हैं।
- चिकनाई निकाले गए पदार्थों का भोजन नहीं करना चाहिऐ, कई बार पेट भरकर भोजन नहीं करना चाहिए, बहुत सवेरे अथवा शाम हो जाने पर भोजन नहीं करना चाहिए। प्रात:काल भर पेट भोजन से तृप्त होने के बाद पुन: शाम को भोजन नहीं करना चाहिऐ।
This entry was written by
दीपक भारतदीप, posted on
September 23, 2007 at 8:14 AM, filed under
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