दूसरा हंसाये क्या जरूरी है

हंसने के लिए क्या हंसी जैसी बात जरूरी है
कोई जबरन हंसाये तो क्या हंसना मज़बूरी है
सहज स्वर और सरल शब्दों से हंसी नहीं आती
क्या चिल्ल-पों पर हंसना जरूरी है
खामोश अदाएं भी बिखेरतीं हैं हंसी के फब्बारे
किसी के फूहड़ डांस पर हंसना क्या जरूरी है
दीवार पर टंगी तस्वीरों को देखकर भी हंस सकते हैं
कोई दाग लगाए तब हँसेंगे, क्या यह सोच जरूरी है
कहैं दीपक बापू मुस्कराते रहो हमेशा चाहे जब हंसो
खुद ही करो हास्य पैदा, कोई दूसरा करे क्या जरूरी है
हंसी कोई बाजार में बिकने वाली चीज नहीं है
बाहर से हंस लो, पर वह अन्दर हो यह भी जरूरी है

Leave a Reply